Himachal News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 54,928 करोड़ रुपये का बजट ध्वनि मत से पास हो गया है। मुख्यमंत्री ने पहली बार प्रदेश की असली आर्थिक हालत पूरी पारदर्शिता के साथ जनता के सामने रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वित्तीय अनुशासन अपनाते हुए इस बार बजट का आकार कुछ कम किया गया है। केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान में काफी कमी आई है। इसके बावजूद सुक्खू सरकार ने सीमित संसाधनों में हर क्षेत्र को संतुलित बजट देने की पूरी कोशिश की है।
भ्रष्टाचार पर नकेल और आम आदमी को राहत
सीएम सुक्खू ने प्रदेश की जनता को एक बड़ा भरोसा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम आदमी और मध्यम वर्ग पर कोई नया आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा। सरकार राज्य को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई नीतिगत सुधार कर रही है। पिछले तीन सालों में लिए गए कड़े फैसलों से सरकारी खजाने की स्थिति मजबूत हुई है। भ्रष्टाचार के सभी ‘चोर दरवाजों’ को हमेशा के लिए बंद किया जा रहा है। वित्त विभाग जल्द ही वित्तीय संसाधन बढ़ाने के लिए नए और सुरक्षित रास्ते तलाशेगा।
कर्ज, विकास और पेंशनरों पर क्या है सरकार का रुख?
हिमाचल का विकास किसी भी कीमत पर रुकने नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में भविष्य में पूंजीगत व्यय को बढ़ाया जाएगा। वेतन और पेंशन जैसे खर्चों में भी उचित संतुलन बनाने का प्रयास जारी है। कर्ज को लेकर उन्होंने स्थिति एकदम स्पष्ट की है। कर्ज लेना एक निरंतर प्रक्रिया है जो राज्य की जीएसडीपी पर निर्भर करती है। सरकार केंद्र से बिना ब्याज वाले ऋण लेने के लिए भी जरूरी सुधार करेगी। पेंशनरों के विरोध पर सीएम ने कहा कि सरकार उनके सम्मान के प्रति प्रतिबद्ध है। बजट की सीमा में रहकर हर हाल में समय पर पेंशन दी जाएगी।
एंट्री टैक्स विवाद पर सीएम सुक्खू का स्पष्टीकरण
पिछले कुछ समय से राज्य में एंट्री टैक्स को लेकर काफी विवाद चल रहा था। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में इस मुद्दे पर भी तस्वीर बिल्कुल साफ कर दी है। उन्होंने बताया कि यह कोई नया टैक्स बिल्कुल नहीं है। यह टैक्स पिछले कई सालों से राज्य में लागू है। छोटी गाड़ियों पर किसी भी तरह का कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला गया है। हालांकि, बड़ी गाड़ियों के टैक्स को तर्कसंगत बनाने पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। इसे कम करने के प्रयास किए जाएंगे ताकि किसी भी वर्ग को परेशानी न हो।


