Health News: एक नई स्टडी में चौंकाने वाला दावा किया गया है। शोध के अनुसार, जिन लोगों में अल्जाइमर से जुड़ा APOE जीन मौजूद होता है, वे नियमित रूप से मीट का सेवन करके डिमेंशिया के खतरे को लगभग आधा तक कम कर सकते हैं। हालांकि, सभी तरह का मीट इसके लिए फायदेमंद नहीं होता।
क्या कहती है नई स्टडी?
स्टॉकहोम यूनिवर्सिटीके शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया। इसमें 60 साल या उससे अधिक उम्र के 2000 से ज्यादा लोगों को करीब 15 साल तक ट्रैक किया गया। शोधकर्ताओं ने इन लोगों की खान-पान की आदतों पर विशेष ध्यान दिया। नतीजे बताते हैं कि APOE4 वेरिएंट वाले लोगों में डिमेंशिया का खतरा अधिक होता है, लेकिन मीट का नियमित सेवन इस खतरे को कम कर सकता है।
45 प्रतिशत तक कम हो सकता है जोखिम
शोध मेंपाया गया कि जिन लोगों में APOE4 जीन था और वे सबसे अधिक मीट खाते थे, उनमें डिमेंशिया का खतरा उन लोगों की तुलना में 45 प्रतिशत कम पाया गया जो मीट कम खाते थे। इन लोगों की सोचने-समझने की क्षमता भी बेहतर बनी रही और मानसिक गिरावट की रफ्तार धीमी देखी गई। यह आंकड़ा शोधकर्ताओं के लिए चौंकाने वाला था।
हर मीट नहीं, अनप्रोसेस्ड मीट जरूरी
शोध मेंएक अहम बात और सामने आई। सभी तरह का मीट फायदेमंद नहीं होता। प्रोसेस्ड मीट जैसे बेकन, सॉसेज या अधिक प्रसंस्कृत मांस दिमाग के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। इससे डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, फायदा पाने के लिए अनप्रोसेस्ड मीट को प्राथमिकता देना जरूरी है।
विटामिन B12 है वजह?
वैज्ञानिकोंका मानना है कि इस फायदे के पीछे विटामिन B12 की अहम भूमिका हो सकती है। मीट में यह विटामिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। विटामिन B12 दिमाग की सेहत और याददाश्त के लिए बेहद जरूरी है। इसकी कमी होने पर याददाश्त कमजोर होना, समझने में दिक्कत और मानसिक समस्याएं हो सकती हैं।
अभी प्रारंभिक स्तर पर है शोध
विशेषज्ञ यह भीमानते हैं कि यह शोध अभी शुरुआती स्तर पर है। इसे पूरी तरह अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। लाइफस्टाइल, आर्थिक स्थिति और अन्य आदतें भी इस पर असर डाल सकती हैं। फिर भी, यह स्पष्ट है कि सही खानपान, सक्रिय जीवनशैली और मानसिक रूप से सक्रिय रहना दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में सहायक होता है।


