India News: दुनिया इस समय गंभीर वैश्विक ऊर्जा संकट का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद भारत की स्थिति बेहद मजबूत है। विश्व बैंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बहुत अच्छी खबर दी है। भारत के पास उच्च विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। इसके अलावा देश में महंगाई दर भी कम है। ये सभी चीजें भारत की आर्थिक वृद्धि को लगातार सहारा दे रही हैं। विश्व बैंक का मानना है कि भारत दुनिया में सबसे अच्छा प्रदर्शन करेगा।
मजबूत नीतियों ने भारत को संकट से उबारा
विश्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक सेबेस्टियन एकार्ट ने भारत की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि भारत ने व्यापारिक उथल-पुथल का अच्छी तरह सामना किया है। कच्चे तेल के बाजारों में इन दिनों भारी अस्थिरता है। फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से खड़ी है। भारत के पास मजबूत नीतिगत उपाय मौजूद हैं। सरकार के पास राजकोषीय क्षमता भी अच्छी है। जरूरत पड़ने पर सरकार तुरंत सहायता प्रदान कर सकती है। भारत के आर्थिक लक्ष्य पूरी तरह स्पष्ट हैं।
मुक्त व्यापार और नई नीतियों से मिलेगा फायदा
भारत की वृद्धि को नई नीतियों का सीधा समर्थन मिल रहा है। यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता बहुत महत्वपूर्ण है। देश की नई श्रम नीति भी अर्थव्यवस्था को रफ्तार दे रही है। विश्व बैंक के अनुसार ये नीतियां आर्थिक गति को पक्का करती हैं। आज दुनिया के सामने कई भारी चुनौतियां खड़ी हैं। इसके बावजूद भारत अन्य उभरते बाजारों की तुलना में सबसे बेहतर प्रदर्शन करेगा। यह भारत के लिए एक बहुत ही शानदार और ऐतिहासिक उपलब्धि है।
जीएसटी कटौती से उपभोक्ता मांग को सहारा
विश्व बैंक ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ा दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह दर 6.6 प्रतिशत तय की गई है। पश्चिम एशिया का संकट आगे चलकर वृद्धि पर असर जरूर डाल सकता है। लेकिन जीएसटी की दरों में कटौती से काफी फायदा होगा। इस अहम फैसले से शुरुआती महीनों में उपभोक्ता मांग को मजबूत सहारा मिलेगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी देश की वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का शानदार अनुमान पहले ही लगाया है।
घरेलू मांग और निर्यात से बढ़ी आर्थिक रफ्तार
विश्व बैंक ने बुधवार को अपनी नई आर्थिक रिपोर्ट जारी की। इसमें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत सकारात्मक बातें कही गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह पिछले साल के 7.1 प्रतिशत से काफी अधिक है। इसका मुख्य कारण भारत की मजबूत घरेलू मांग और शानदार निर्यात है। देश के निजी उपभोग में भी बहुत मजबूत वृद्धि देखी गई है। कम महंगाई दर ने इसे सीधा सहारा दिया है।
महंगी ऊर्जा और सब्सिडी बढ़ा सकती है परेशानी
भविष्य में भारत के सामने कुछ नई चुनौतियां भी खड़ी हैं। विश्व बैंक के अनुसार 2026-27 में वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रह सकती है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष इसके लिए जिम्मेदार है। ऊंची ऊर्जा कीमतें देश में महंगाई बढ़ा सकती हैं। इससे परिवारों की आय पर भारी दबाव पड़ेगा। रसोई गैस और उर्वरक पर सरकार का सब्सिडी खर्च लगातार बढ़ रहा है। कच्चे माल की लागत बढ़ने से देश में निवेश की गति भी कुछ हद तक धीमी पड़ सकती है।

