Tamil Nadu News: मद्रास हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में मौत के मामले में एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने पिता-पुत्र की बेरहमी से हत्या करने वाले नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा दी है। इस पूरे मामले ने देशभर की कानून व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। पांच साल लंबे चले इस केस में लेडी सिंघम के नाम से मशहूर एक महिला हेड कॉन्स्टेबल की गवाही सबसे ज्यादा अहम साबित हुई है।
साथनकुलम केस में महिला पुलिसकर्मी की साहसिक गवाही
तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले का साथनकुलम कस्टोडियल डेथ केस पूरे देश में चर्चा का विषय बना था। घटना के वक्त थाने में ड्यूटी पर तैनात महिला हेड कॉन्स्टेबल रेवती ने अद्भुत साहस का परिचय दिया। उन्होंने बिना किसी डर या दबाव के पूरी घटना अदालत के सामने विस्तार से रखी। रेवती ने पुलिस हिरासत में हुई मारपीट और अमानवीय क्रूरता का पूरा सच दुनिया को बताया। उनकी इसी गवाही ने केस बदला।
पिता और पुत्र के साथ हुई थी अमानवीय क्रूरता
रेवती के बयान के अनुसार पुलिस ने जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को हिरासत में लिया था। थाने के भीतर बाप और बेटे को बहुत बेरहमी के साथ बुरी तरह पीटा गया। उन्हें पुलिसकर्मियों द्वारा लगातार कई अमानवीय शारीरिक यातनाएं दी गईं। इस भयंकर क्रूरता के कारण ही दोनों की दर्दनाक मौत हो गई थी। रेवती के इस बड़े खुलासे ने पुलिस व्यवस्था के पीछे छिपी भयंकर दरिंदगी को पूरी तरह उजागर किया।
धमकी के बावजूद पीछे नहीं हटी महिला कांस्टेबल
सच सामने लाने की इस पूरी प्रक्रिया में रेवती को भारी दबाव का सामना करना पड़ा। उन्हें और उनके परिवार को कई बार गंभीर धमकियां भी दी गईं। इसके बावजूद इस बहादुर पुलिसकर्मी ने पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने निडर होकर सीधे मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराया। अदालत और सरकार ने रेवती की कड़ी सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस इंतजाम किए थे। अदालत का यह कड़ा फैसला एक मिसाल बनेगा।

