Rajasthan News: राजस्थान के नागौर में ट्रैफिक पुलिस की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां पुलिस ने इलेक्ट्रिक कार का प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) न होने पर चालान काट दिया। बैटरी से चलने वाले वाहनों को प्रदूषण सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती है। पुलिस और कार चालक की बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने जांच के कड़े आदेश दिए हैं।
काले शीशे से शुरू हुआ विवाद और कट गया प्रदूषण चालान
यह अजीबोगरीब घटना नागौर के आरटीओ चौराहे पर सात अप्रैल को हुई। पुलिस अधिकारी ने टाटा टियागो ईवी को काले शीशे और सनशेड के इस्तेमाल पर रोका था। कार मालिक ने सनशेड हटाने का विरोध किया। इसी बहस के बीच पुलिस ने मशीन में गाड़ी का नंबर डाला। मशीन ने प्रदूषण सर्टिफिकेट ‘निल’ दिखाया। इसके बाद पुलिस ने 1700 रुपये का भारी चालान काट दिया। इसमें 1500 प्रदूषण और 200 रुपये शीशे के थे।
चालक की दलील को पुलिस ने पूरी तरह कर दिया अनसुना
वायरल वीडियो में कार चालक पुलिस अधिकारी को लगातार नियम समझाने की कोशिश कर रहा है। वह बार-बार बता रहा है कि इलेक्ट्रिक कार में इंजन नहीं होता है। इससे किसी तरह का धुआं नहीं निकलता है। मोटर वाहन अधिनियम के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रदूषण जांच से पूरी तरह छूट मिली हुई है। इसके बावजूद अधिकारी ने एक नहीं सुनी। उसने कहा कि मशीन जो दिखा रही है, उसी पर जुर्माना होगा।
गलती सामने आने पर अधिकारियों ने दिए सख्त जांच के आदेश
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग की जमकर आलोचना हो रही है। लोग पुलिस की समझ पर कड़े सवाल उठा रहे हैं। मामला बढ़ता देख नागौर जिला परिवहन अधिकारी अवधेश चौधरी ने अपना बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रदूषण प्रमाणपत्र की कोई जरूरत नहीं होती है। ट्रैफिक प्रभारी शिवदेव राम ने बताया कि यह चालान गलती से काटा गया है। चालान हटाने की प्रक्रिया जारी है।

