India News: बीआरएस नेता के. कविता ने पाकिस्तान की नोबेल शांति पुरस्कार की मांग का कड़ा मजाक उड़ाया है। हाल ही में अमेरिका और ईरान सीजफायर के बाद पाकिस्तानी मीडिया ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के लिए नोबेल की वकालत की। इस पर कविता ने तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का गढ़ रहा पाकिस्तान अब अपने नेताओं के लिए शांति का नोबेल मांग रहा है। यह पूरी तरह से हास्यास्पद है।
पाकिस्तानी मीडिया की अनोखी मांग
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में पंद्रह दिनों के सीजफायर की घोषणा हुई है। इसके बाद पाकिस्तानी मीडिया और कराची चैंबर ऑफ कॉमर्स ने एक नई मांग उठा दी। उनका दावा है कि इस शांति समझौते में शहबाज शरीफ और मुनीर ने अहम भूमिका निभाई है। पाकिस्तानी समाचार चैनलों पर लगातार बहस चल रही है कि दुनिया को इन दोनों नेताओं को नोबेल पुरस्कार देना चाहिए। वे इसे पाकिस्तान की एक बड़ी कूटनीतिक जीत मान रहे हैं।
के. कविता का तीखा और करारा तंज
पाकिस्तान की इस बेतुकी मांग पर भारतीय नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बीआरएस नेता के. कविता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना कड़ा गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या अगला नोबेल पुरस्कार हाफिज सईद और मसूद अजहर को मिलेगा? कविता ने स्पष्ट किया कि एक ऐसा देश जो पूरी दुनिया में आतंकवाद फैलाता है, उसके नेता शांति पुरस्कार के हकदार कभी नहीं हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की किरकिरी
इस पूरी घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी पाकिस्तान का भारी मजाक उड़ रहा है। लोग कह रहे हैं कि यह इस सदी का सबसे बड़ा चुटकुला है। जानकारों के मुताबिक, आतंकवाद को पालने वाले देश के नेताओं के लिए ऐसे सम्मान की बात करना बिल्कुल गलत है। पूरी दुनिया जानती है कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे खूंखार संगठनों के सरगना पाकिस्तान में ही सुरक्षित पनाह लेते हैं। ऐसे में नोबेल की मांग बेमानी साबित होती है।

