JP आंदोलन से राज्यसभा तक: 75 साल की उम्र में नीतीश कुमार ने ली सांसद की शपथ, 5 दशक का सफर पूरा

India News: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 10 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले ली। 75 वर्ष की आयु में संसद के उच्च सदन में उनकी यह नई पारी महज एक पद नहीं है। यह उनके पांच दशक लंबे राजनीतिक जीवन के पूर्ण चक्र (फुल सर्किल) का प्रतीक है। जेपी आंदोलन से निकले इस छात्र नेता ने आज राज्यसभा की सीढ़ियां चढ़ ली हैं।

छात्र राजनीति से विधानसभा तक का सफर

नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन की नींव बिहार के छात्र आंदोलनों में पड़ी। 1970 के दशक में वह जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से जुड़े। 1985 में हरनौत सीट से पहली बार विधायक बने। 1986-87 में वह विधानसभा की याचिका समिति और सार्वजनिक उपक्रम समिति के सदस्य रहे। यहीं से उनके राजनीतिक करियर की नींव मजबूत हुई।

छह बार लोकसभा सांसद रहे, केंद्र में संभाले कई मंत्रालय

1989 में बाढ़ से पहली बार लोकसभा पहुंचे। 1990 में कृषि और सहयोग राज्य मंत्री बने। 1994 में जॉर्ज फर्नांडिस के साथ समता पार्टी की स्थापना की। 1998 में रेलवे और भूतल परिवहन के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रहे। 1999 में फिर सांसद बने। कुल मिलाकर छह बार लोकसभा के लिए चुने गए। केंद्र में उन्होंने कृषि, रेलवे और रक्षा जैसे अहम मंत्रालयों को संभाला।

बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में 15 साल से अधिक का कार्यकाल

2000 में पहली बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत न होने के कारण इस्तीफा देना पड़ा। 2003 में जनता दल (यूनाइटेड) का गठन हुआ। 24 नवंबर 2005 को पूर्ण बहुमत के साथ मुख्यमंत्री पद संभाला। 2014 में लोकसभा हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। 2015 में वापसी की और महागठबंधन के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की। 2017 से 2024 के बीच कई बार गठबंधन बदले, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहे।

राज्यसभा का नया अध्याय: क्या है आगे की राह?

मार्च 2026 में सक्रिय मुख्यमंत्री रहते हुए वह पहली बार राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए। 30 मार्च 2026 को उन्होंने बिहार विधान परिषद (एमएलसी) की सदस्यता से इस्तीफा दिया। अब 10 अप्रैल 2026 को उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले ली है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री पद से उनके संभावित इस्तीफे और दिल्ली में किसी बड़ी राष्ट्रीय भूमिका को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। यह सफर दिखाता है कि कैसे एक छात्र नेता 6 बार सांसद और सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने के बाद अब संसद के उच्च सदन में पहुंच गया है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories