India News: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक ऐसे सनसनीखेज जासूसी रैकेट का भंडाफोड़ किया है जिसने भारतीय सेना और बीएसएफ की सुरक्षा में बड़ी सेंध लगाई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस साजिश के पीछे कोई अनपढ़ अपराधी नहीं, बल्कि एमबीए (MBA) और बीसीए (BCA) जैसे उच्च शिक्षित युवा शामिल हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) के इशारे पर ये युवा सीसीटीवी कैमरों के जरिए सैन्य ठिकानों की लाइव फुटेज सीमा पार भेज रहे थे। पुलिस ने इस ऑपरेशन में शामिल मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है, जिनसे अब सुरक्षा एजेंसियां कड़ाई से पूछताछ कर रही हैं।
CCTV कैमरों के जरिए सरहद पार हो रही थी लाइव स्ट्रीमिंग
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने सीमावर्ती इलाकों और महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों के पास रणनीतिक रूप से सीसीटीवी कैमरे लगाए थे। इन कैमरों का एक्सेस आईपी एड्रेस के जरिए सीधे पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं को दिया गया था। इससे ISI के हैंडलर्स भारतीय सेना की गतिविधियों, हथियारों की आवाजाही और जवानों के मूवमेंट को अपने दफ्तर में बैठकर लाइव देख पा रहे थे। तकनीक का ऐसा खतरनाक इस्तेमाल पहले कभी नहीं देखा गया, जिसने पारंपरिक जासूसी के तरीकों को पीछे छोड़ दिया है।
पढ़े-लिखे युवाओं को जाल में फंसाकर बनाया जासूस
स्पेशल सेल के अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी काफी पढ़े-लिखे हैं और तकनीकी रूप से बेहद सक्षम हैं। हैंडलर्स ने सोशल मीडिया के जरिए इन युवाओं से संपर्क किया और उन्हें मोटी रकम का लालच देकर देश के खिलाफ काम करने के लिए उकसाया। एमबीए और बीसीए की डिग्री होने के कारण इन युवाओं ने बहुत ही बारीकी से डिजिटल नेटवर्क तैयार किया था। जासूसी के इस काम को एक प्रोफेशनल आईटी प्रोजेक्ट की तरह अंजाम दिया जा रहा था ताकि किसी को शक न हो।
ISI और बब्बर खालसा इंटरनेशनल का मिलाजुला कनेक्शन
इस पूरे मॉड्यूल का संचालन पाकिस्तान से हो रहा था, जहां ISI और खालिस्तानी आतंकी संगठन BKI के नेता मिलकर काम कर रहे हैं। इनका मकसद केवल जासूसी करना ही नहीं, बल्कि पंजाब और दिल्ली में आतंकी वारदातों के लिए रेकी करना भी था। पुलिस को आशंका है कि कैमरों से मिली जानकारी का इस्तेमाल आने वाले समय में बड़े हमलों की साजिश रचने के लिए किया जा सकता था। खुफिया एजेंसियों ने अब उन सभी आईपी एड्रेस और सर्वर्स को ब्लॉक कर दिया है जिनसे डेटा चोरी किया जा रहा था।
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने ऐसे बिछाया जाल
सुरक्षा एजेंसियों को तकनीकी निगरानी के दौरान सीमावर्ती इलाकों से संदिग्ध डेटा ट्रांसफर होने के संकेत मिले थे। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कई हफ्तों तक इन डिजिटल सिग्नल्स का पीछा किया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में हाई-टेक उपकरण, कई मोबाइल फोन और जासूसी में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर बरामद किए। आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे पिछले कई महीनों से पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में थे और उन्हें महत्वपूर्ण डेटा के बदले भारी भुगतान मिल रहा था।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती है डिजिटल जासूसी
इस घटना ने देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने एक नई चुनौती पेश कर दी है। अब दुश्मन पारंपरिक जासूसों के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी विशेषज्ञों का सहारा ले रहे हैं। गृह मंत्रालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी सैन्य छावनियों और संवेदनशील इलाकों में निजी सीसीटीवी कैमरों के इस्तेमाल को लेकर नई गाइडलाइंस जारी करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस अब उन अन्य स्लीपर सेल्स की तलाश कर रही है जो शायद इसी तरह के गुप्त नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं।

