India News: ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच भारत के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर बढ़त देखने को मिली है। इस बार इसमें 9.06 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। अब भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 697.12 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब दुनिया के बड़े भू-भाग में दो युद्ध चल रहे हैं।
रूस-यूक्रेन और ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच मिली राहत
दुनियाभर में इस समय अनिश्चितता का माहौल है। एक तरफ रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है तो दूसरी तरफ ईरान-अमेरिका के बीच जंग चल रही है। ऐसे में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी ने बाजार को कुछ राहत दी है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। पिछले कुछ दिनों में वैश्विक हालात और करेंसी में उतार-चढ़ाव के कारण रिजर्व पर दबाव बना हुआ था।
विदेशी मुद्रा संपत्ति और सोने के भंडार में भी उछाल
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA) होता है। इसमें करीब 1.78 अरब डॉलर की बढ़त दर्ज की गई है। यह आंकड़ा यूरो, पाउंड और येन जैसी वैश्विक मुद्राओं में उतार-चढ़ाव से प्रभावित होता है। इसके अलावा देश के गोल्ड रिजर्व में भी लगभग 1.78 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। इससे कुल भंडार और मजबूत हुआ है। स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में हल्की बढ़त दर्ज की गई और यह 18.707 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
पिछले हफ्ते आई थी 10 अरब डॉलर से अधिक की गिरावट
इससे पहले 27 मार्च को खत्म हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट आई थी। यह 10.28 अरब डॉलर गिरकर 688.05 अरब डॉलर पर आ गया था। यह लगातार दूसरी साप्ताहिक गिरावट थी, जिससे बाजार में चिंता बढ़ गई थी। फरवरी के अंत में भारत का फॉरेक्स रिजर्व 728.49 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इसमें गिरावट देखने को मिली। इसका सीधा असर भारतीय रुपये पर भी पड़ा था।
रुपये को संभालने में RBI की अहम भूमिका
रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है। इसे कम करने के लिए RBI लगातार सक्रिय है। केंद्रीय बैंक बाजार में डॉलर बेचकर और जरूरी नीतिगत कदम उठाकर स्थिति को स्थिर रखने की कोशिश कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ भारत की रिजर्व पोजिशन 4.816 अरब डॉलर पर स्थिर बनी रही। कुल मिलाकर ताजा बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था को थोड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए आगे भी सतर्क रहने की जरूरत बनी हुई है।

