India News: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा, रक्षा और व्यापार सुरक्षा को लेकर कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी रविवार से पेरिस और बर्लिन की तीन दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं। इससे पहले वह अमेरिका का दौरा कर चुके हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर यूएई पहुंच चुके हैं, जहां वह ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी पर बातचीत करेंगे।
युद्धविराम वार्ता के बीच भारत की सक्रिय कूटनीति
ये सारी कोशिशें उस समय हो रही हैं जब ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ है। इस्लामाबाद में युद्धविराम वार्ता को लेकर दोनों देशों के प्रतिनिधि जुटे हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिका में विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ट्रंप प्रशासन के अन्य बड़े अधिकारियों से मिल चुके हैं। अब वह फ्रांस और जर्मनी का रुख किया है। इस दौरे की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट का संकट और उससे ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाला असर है।
भारत की ऊर्जा जरूरतों पर संकट का खतरा
भारत अपनी तेल-गैस जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट क्षेत्र पर बहुत अधिक निर्भर है। अगर यहां युद्ध लंबा चला तो भारत को महंगी ऊर्जा खरीदनी पड़ सकती है। इसलिए भारत यूरोपीय देशों के साथ मिलकर विकल्प तलाश कर रहा है। विदेश सचिव का यह दौरा उस ‘एनर्जी मिशन’ का हिस्सा है, जिसमें विदेश मंत्री जयशंकर भी यूएई में जुटे हुए हैं। दोनों शीर्ष राजनयिक एक साथ कई मोर्चों पर भारत के हितों को मजबूत कर रहे हैं।
पेरिस में क्या होगा: रक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष पर बात
फ्रांस में विदेश सचिव फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के महासचिव मार्टिन ब्रियेंस के साथ ‘भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय परामर्श’ की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस दौरान रक्षा, आम परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, साइबर, डिजिटल, एआई और लोगों के बीच आदान-प्रदान पर बात होगी। साथ ही दुनिया और क्षेत्र के ताजा मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। फ्रांस भारत का लंबे समय से रणनीतिक साझेदार रहा है। दोनों देश रक्षा क्षेत्र में गहरे सहयोग को और आगे बढ़ाना चाहते हैं।
बर्लिन में व्यापार, निवेश और हरित ऊर्जा पर होगी चर्चा
जर्मनी में मिसरी जर्मन विदेश कार्यालय के राज्य सचिव गेजा एंड्रियास वॉन गेयर के साथ ‘भारत-जर्मनी विदेश कार्यालय परामर्श’ की सह-अध्यक्षता करेंगे। इसमें व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, टेक्नोलॉजी, हरित ऊर्जा, विकास सहयोग, शिक्षा और आपसी हितों के वैश्विक व क्षेत्रीय मामलों पर चर्चा होगी। जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने का अवसर है।
यूरोपीय नेताओं के भारत दौरे के बाद यह यात्रा अहम क्यों?
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जनवरी और फरवरी में भारत का दौरा किया था। विदेश सचिव का यूरोप दौरा भारत और इन देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की पूरी तस्वीर को समझने और मजबूत करने का मौका है। भारत इस दौरे के जरिए अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने, नए रक्षा सौदों और टेक्नोलॉजी साझेदारी को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत एक विश्वसनीय और मजबूत भागीदार के रूप में उभर रहा है।


