India News: भारत के जहाजरानी मंत्रालय ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के अनुरोध पर ईरानी तेल ले जा रहे चार अमेरिकी प्रतिबंधित टैंकरों को गुजरात के सिक्का बंदरगाह पर लंगर डालने की विशेष अनुमति दे दी है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। यह अनुमति होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से पैदा हुई आपातकालीन स्थिति के कारण दी गई है।
अमेरिकी दबाव के बावजूद मिली एक बार की छूट
अमेरिकी दबाव के चलते भारत मई 2019 से ईरान से तेल नहीं मंगा पा रहा था। हालांकि, बढ़ती तेल कीमतों को देखते हुए अमेरिका ने पिछले महीने समुद्री रास्ते से ईरानी तेल खरीदने पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दे दी थी। यह छूट 19 अप्रैल को समाप्त हो रही है। शिपिंग मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स को चलाने वाली कंपनी रिलायंस के अनुरोध पर यह विशेष, एक बार की छूट दी गई है।
चारों टैंकर ‘शैडो फ्लीट’ के हैं, उम्र 20 साल से अधिक
जिन चार जहाजों को सिक्का पोर्ट पर रुकने की अनुमति मिली है, उनके नाम काविज, लेनोर, फेलिसिटी और हेडी हैं। ये टैंकर ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा हैं। ऐसे जहाज 20 साल से अधिक पुराने होते हैं और इनके पास अंतर्राष्ट्रीय बीमा नहीं होता। भारतीय नियमों के अनुसार, ऐसे जहाजों को बंदरगाहों पर आने के लिए सरकार से विशेष अनुमति लेनी पड़ती है। इसी वजह से रिलायंस ने सरकार से यह अनुरोध किया था। अनुमति होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की आपात स्थिति के तहत दी गई है।
रिलायंस ने अभी तय नहीं किया कि तेल प्रोसेस करेगी या नहीं
अनुमति मिलने के बावजूद यह पक्का नहीं है कि रिलायंस इस ईरानी तेल को प्रोसेस करेगी या नहीं। कंपनी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सभी लेन-देन अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों और भारतीय नियमों का पूरी तरह से पालन करते हुए ही किए जाएं। भारत सरकार की यह छूट तेल संकट के बीच एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जबकि वैश्विक स्तर पर ईरानी तेल को लेकर अमेरिकी प्रतिबंध अभी भी जारी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि रिलायंस इस तेल का उपयोग करती है या नहीं।

