Himachal News: आइआइटी मंडी और माइंड ट्री स्कूल प्रबंधन के बीच भारी विवाद खड़ा हो गया है। स्कूल प्रबंधन ने आइआइटी प्रशासन पर तानाशाही और मनमाने रवैये का गंभीर आरोप लगाया है। इस आपसी लड़ाई में नौवीं से बारहवीं कक्षा तक के सैकड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। आइआइटी प्रशासन ने स्कूल को निष्कासन का कड़ा नोटिस थमा दिया है। अब यह पूरा मामला हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की चौखट पर पहुंच चुका है।
विवाद की असली वजह
साल 2017 में एक विज्ञापन के जरिए माइंड ट्री स्कूल को आइआइटी कैंपस में बुलाया गया था। दोनों पक्षों के बीच 33 वर्षों के लिए एक विधिवत लीज करार हुआ था। शुरुआत में सब कुछ बिल्कुल सही चल रहा था। लेकिन 2022 में नई स्कूल प्रबंधन समिति बनने के बाद परेशानियां शुरू हो गईं। आइआइटी के नामित सदस्य स्कूल के दैनिक कामकाज में अनुचित दखल देने लगे।
दबाव और अचानक टर्मिनेशन
स्कूल प्रबंधन का आरोप है कि आइआइटी प्रशासन ने शिक्षा से समझौता करने का दबाव बनाया। उन पर भारी किराया वृद्धि थोपी गई और गलत तरीके से जीएसटी की मांग की गई। विवाद तब सबसे ज्यादा बढ़ गया जब छह मई 2024 को एक नोटिस मिला। आइआइटी मंडी के रजिस्ट्रार ने बिना स्पष्ट कारण के स्कूल बंद करने का फरमान सुना दिया। प्रबंधन ने दो साल तक निदेशक से गुहार लगाई लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
छात्रों का साल बर्बाद होने का डर
स्कूल के ट्रस्टी हिरदेश मदान ने छात्रों के भविष्य पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर आइआइटी मंडी जबरन स्कूल का अधिग्रहण करता है तो नुकसान होगा। ऐसे हालात में छात्र आगामी बोर्ड परीक्षाओं में बिल्कुल नहीं बैठ पाएंगे। मदान ने बताया कि सीबीएसई नियमों के अनुसार नई संबद्धता मिलने में समय लगता है। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम दो साल का लंबा समय लग जाता है।
अभिभावकों को गुमराह करने का आरोप
मौजूदा छात्रों का रजिस्ट्रेशन और रोल नंबर अब पूरी तरह से अधर में लटक गया है। स्कूल प्रबंधन ने आइआइटी प्रशासन पर अभिभावकों को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रशासन लगातार अभिभावकों को फीस न भरने की सलाह दे रहा है। इसके साथ ही नई यूनिफार्म न खरीदने के लिए भी बार-बार कहा जा रहा है। प्रबंधन के मुताबिक यह छवि खराब करने की एक साजिश है।
अदालत के फैसले पर टिकी निगाहें
स्कूल प्रबंधन का मानना है कि आइआइटी का यह कदम छात्रों की शिक्षा में बड़ी बाधा है। बिना किसी पूर्व सूचना के इस तरह का कठोर कदम उठाना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। अब सभी छात्रों और अभिभावकों की निगाहें उच्च न्यायालय के फैसले पर टिकी हैं। अदालत का फैसला ही इन सैकड़ों छात्रों का आगामी भविष्य तय करेगा। इस बीच आइआइटी मंडी परिसर में तनाव का माहौल लगातार बना हुआ है।


