Himachal News: हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश सरकार ने 8 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू करने का ऐलान कर दिया है। इस बार किसानों को बढ़ी हुई कीमतों का सीधा लाभ मिलेगा। खाद्य आपूर्ति विभाग ने राज्यभर में खरीद केंद्रों के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। खास बात यह है कि इस वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 160 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। किसानों को अब अपनी फसल के लिए 2585 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलेगा।
पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू: 15 जून तक चलेगी सरकारी खरीद
खाद्य आपूर्ति विभाग के पोर्टल पर किसानों का ऑनलाइन पंजीकरण तेजी से चल रहा है। 5 अप्रैल तक लगभग 255 किसान अपना ब्यौरा दर्ज करवा चुके हैं। इनमें से 176 किसानों के दस्तावेज विभाग ने सत्यापित भी कर दिए हैं। प्रशासन ने 67 किसानों के लिए टोकन भी जारी कर दिए हैं। गेहूं की यह खरीद प्रक्रिया 8 अप्रैल से शुरू होकर 15 जून तक लगातार जारी रहेगी। किसान समय रहते पोर्टल पर अपनी फसल की जानकारी अपलोड कर सकते हैं।
न्यूनतम समर्थन मूल्य में बड़ी वृद्धि: किसानों की जेब में आएंगे ज्यादा पैसे
सुक्खू सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने के लिए एमएसपी में बड़ा इजाफा किया है। पिछले साल गेहूं का सरकारी भाव 2425 रुपये प्रति क्विंटल था। इस साल इसे बढ़ाकर 2585 रुपये कर दिया गया है। 160 रुपये की यह सीधी बढ़ोतरी किसानों के लिए किसी सौगात से कम नहीं है। विभाग का लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक पात्र किसान को सरकार द्वारा तय की गई इस उचित दर का पूरा लाभ मिले।
इन 11 केंद्रों पर होगी गेहूं की खरीद: अपनी नजदीकी मंडी का जानें नाम
सरकार ने प्रदेश भर में 11 विशेष गेहूं खरीद केंद्र स्थापित किए हैं। इनमें सिरमौर जिले के धौला कुआं और पावंटा साहिब शामिल हैं। ऊना जिले के टकारला और सोलन के नालागढ़ व बददी में भी केंद्र बनाए गए हैं। कांगड़ा जिले के फतेहपुर, इंदौरा, रियाली, नगरोटा वगवां और बैजनाथ में किसान अपनी फसल बेच सकेंगे। इसके अलावा ऊना की रामपुर मंडी में भी खरीद की व्यवस्था की गई है। इन केंद्रों पर किसान टोकन के आधार पर फसल ला सकेंगे।
टोकन सिस्टम और पंजीकरण के नियम: एक मोबाइल से केवल एक रजिस्ट्रेशन
किसानों को फसल बेचने के लिए आधिकारिक पोर्टल hpappp.nic.in पर पंजीकरण करना अनिवार्य है। ऑनलाइन आवेदन के बाद विभाग किसानों को एक निश्चित तिथि और टोकन नंबर आवंटित करेगा। आवंटित तिथि पर ही किसान खरीद केंद्र पहुंचकर अपनी फसल बेच पाएंगे। विभाग ने नियमों को सख्त रखते हुए एक मोबाइल नंबर पर केवल एक ही पंजीकरण की अनुमति दी है। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और किसानों को केंद्रों पर लंबी लाइनों से छुटकारा मिलेगा।


