Social Media की सनक या हैवानियत? रील बनाने के चक्कर में पिता ने मासूम को बालकनी से नीचे कुदवाया; रूह कांप जाएगा वीडियो देखकर

India News: सोशल मीडिया पर लाइक और व्यूज पाने की अंधी दौड़ ने मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रख दिया है। एक दिल दहला देने वाले मामले में एक पिता ने महज एक ‘रील’ बनाने के लिए अपने मासूम बच्चे की जान जोखिम में डाल दी। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पिता ने बच्चे को बालकनी से नीचे कूदने के लिए मजबूर किया। इस घटना ने इंटरनेट यूजर्स को झकझोर कर रख दिया है। लोग सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

लाइक और व्यूज के लिए मासूम की जान दांव पर

आजकल लोग चंद सेकंड की शोहरत के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। इस वायरल क्लिप में एक पिता अपनी बालकनी पर खड़ा नजर आता है। वह अपने छोटे बच्चे को रेलिंग के पार ले जाकर नीचे कूदने के लिए उकसाता है। बच्चा डरा हुआ दिख रहा है, लेकिन पिता उसे लगातार निर्देश दे रहा है। जैसे ही बच्चा नीचे कूदता है, वीडियो काट दिया जाता है। हालांकि नीचे सुरक्षा के लिए गद्दे रखे होने का दावा किया गया है, लेकिन ऊंचाई से गिरना बच्चे के लिए जानलेवा हो सकता था।

सोशल मीडिया पर फूटा जनता का गुस्सा और कार्रवाई की मांग

वीडियो के वायरल होते ही नेटिजन्स ने इस कृत्य की कड़ी निंदा शुरू कर दी है। ट्विटर और इंस्टाग्राम पर लोग इस पिता को ‘गैर-जिम्मेदार’ और ‘क्रूर’ बता रहे हैं। कई यूजर्स ने स्थानीय पुलिस और बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) को टैग करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह केवल एक रील नहीं, बल्कि बच्चे के साथ क्रूरता का मामला है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे वीडियो अन्य लोगों को भी खतरनाक स्टंट करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।

बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता बुरा असर

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, माता-पिता द्वारा बच्चों को ऐसे खतरनाक कृत्यों में शामिल करना उनके मानसिक स्वास्थ्य को बिगाड़ सकता है। बच्चों के मन में ऊंचाई या गिरने का स्थायी डर बैठ सकता है। साथ ही, उन्हें यह गलत संदेश जाता है कि ध्यान खींचने के लिए जोखिम उठाना सही है। शारीरिक चोट लगने की संभावना तो हमेशा बनी ही रहती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी अब ऐसे ‘हार्मफुल’ कंटेंट को तुरंत हटाने के लिए सख्त एल्गोरिदम और नीतियों की आवश्यकता है।

बढ़ते डिजिटल एडिक्शन और रील संस्कृति का काला सच

यह घटना केवल एक व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि समाज में फैल रहे डिजिटल एडिक्शन का लक्षण है। लोग अब वास्तविक अनुभवों के बजाय ‘वर्चुअल वैलिडेशन’ को अधिक महत्व दे रहे हैं। रील बनाने की संस्कृति ने लोगों की सोचने-समझने की शक्ति को कुंद कर दिया है। आए दिन खतरनाक जगहों पर रील बनाते हुए मौत की खबरें आती रहती हैं। अब समय आ गया है कि समाज और कानून मिलकर ऐसे आत्मघाती और दूसरों की जान जोखिम में डालने वाले व्यवहार पर लगाम लगाएं।

सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और कानूनी प्रावधान

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि यह वीडियो कहां का है और इसमें दिख रहा व्यक्ति कौन है। सोशल मीडिया कंपनियों को भी अपनी जवाबदेही तय करनी होगी ताकि ऐसे हिंसक या खतरनाक वीडियो को प्रमोट न किया जाए। दर्शकों को भी चाहिए कि वे ऐसे कंटेंट को रिपोर्ट करें और उन्हें बढ़ावा न दें। आपकी एक छोटी सी रिपोर्ट किसी की जान बचा सकती है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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