India News: लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) का इंतजार अब इम्तिहान बनता जा रहा है। अप्रैल का दूसरा हफ्ता शुरू होने के बावजूद सरकार ने अभी तक भत्ते में बढ़ोतरी का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। अमूमन होली के आसपास होने वाली यह घोषणा इस बार उम्मीद से कहीं ज्यादा खिंच गई है। सातवें वेतन आयोग के इतिहास में यह अब तक की सबसे लंबी देरी मानी जा रही है, जिससे कर्मचारियों में बेचैनी बढ़ गई है।
आखिर क्यों अटक गया महंगाई भत्ता?
महंगाई भत्ते में देरी के पीछे कई वैश्विक और रणनीतिक कारण बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और तनाव ने सरकार के वित्तीय गणित को प्रभावित किया है। वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में अस्थिरता और सप्लाई चेन में बाधा के चलते केंद्र सरकार वित्तीय फैसले बहुत सोच-समझकर ले रही है। इसके साथ ही, 8वें वेतन आयोग के गठन की सुगबुगाहट और नए वित्तीय वर्ष के बजट तालमेल को भी इस देरी की एक अहम वजह माना जा रहा है।
कितनी होगी बढ़ोतरी और क्या है नया गणित?
ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) के पिछले 12 महीनों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो इस बार 2% की वृद्धि लगभग तय है। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों को 58% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। इस नई बढ़ोतरी के बाद यह आंकड़ा 60% तक पहुंच जाएगा। राहत की बात यह है कि यह इजाफा 1 जनवरी, 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि घोषणा में देरी के बावजूद कर्मचारियों को पिछले महीनों का पूरा एरियर (Arrear) एकमुश्त मिलेगा।
अगले हफ्ते ‘गुड न्यूज’ मिलने के प्रबल आसार
ताजा प्रशासनिक हलचलों और आर्थिक जानकारों की मानें तो मोदी सरकार अगले हफ्ते बड़ा ऐलान कर सकती है। अप्रैल का दूसरा सप्ताह खत्म होने से पहले कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लग सकती है। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में वेतन आयोग के ढांचे में संभावित बदलावों और चुनावी समीकरणों को देखते हुए यह समय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार इस घोषणा के जरिए लाखों परिवारों को महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत देने की तैयारी में है।
वेतन आयोग और DA से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
केंद्र सरकार साल में दो बार, यानी जनवरी और जुलाई में महंगाई भत्ते की समीक्षा करती है। कोविड काल के दौरान जब देश आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब 18 महीनों के लिए DA को 17% पर फ्रीज कर दिया गया था। हालांकि 31 दिसंबर 2025 को सातवें वेतन आयोग का आधिकारिक कार्यकाल तकनीकी रूप से समाप्त हो चुका है, लेकिन जब तक 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू नहीं होतीं, तब तक कर्मचारियों को वर्तमान व्यवस्था के तहत ही लाभ मिलता रहेगा।
कर्मचारियों की जेब पर कितना होगा असर?
DA में 2% की बढ़ोतरी भले ही छोटी लगे, लेकिन पे-मैट्रिक्स के हिसाब से यह कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में सम्मानजनक इजाफा करेगी। उदाहरण के तौर पर, जिनकी बेसिक सैलरी अधिक है, उनके मासिक वेतन में हजारों रुपये की बढ़ोतरी होगी। पेंशनभोगियों के लिए भी महंगाई राहत (DR) में इसी अनुपात में वृद्धि होगी। अब सबकी निगाहें कैबिनेट की अगली बैठक पर टिकी हैं, जहां इस फाइल पर अंतिम मुहर लगनी बाकी है।


