लोकसभा में 816 सीटें और महिलाओं का राज? मोदी कैबिनेट का वो बड़ा फैसला जिसने देश की सियासत में ला दिया भूचाल

India News: मोदी सरकार ने देश की संसदीय व्यवस्था को बदलने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और एक नए परिसीमन विधेयक को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू करना है। सरकार ने इसके लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाने का निर्णय लिया है ताकि प्रक्रिया में देरी न हो।

विशेष सत्र से पहले कैबिनेट की बड़ी मुहर

संसद का विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक आयोजित होने वाला है। इस सत्र के शुरू होने से ठीक पहले कैबिनेट का यह निर्णय काफी रणनीतिक माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि सरकार महिला आरक्षण के क्रियान्वयन में तेजी लाना चाहती है। प्रधानमंत्री ने दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को भी दूर किया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि नई व्यवस्था से संसद में दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

लोकसभा की तस्वीर बदलेगा नया परिसीमन विधेयक

कैबिनेट ने महिला आरक्षण के साथ-साथ एक बेहद महत्वपूर्ण परिसीमन विधेयक को भी मंजूरी दी है। इस विधेयक के कानूनी रूप लेते ही लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा की मौजूदा 543 सीटें बढ़कर 816 तक पहुंच सकती हैं। इस नई व्यवस्था में महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित होंगी। यह बदलाव भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक सर्जरी साबित हो सकता है।

2011 की जनगणना ही क्यों बनी आधार?

आमतौर पर परिसीमन और आरक्षण के लिए नवीनतम जनगणना के आंकड़ों का इंतजार किया जाता है। सरकार ने 2027 की अगली जनगणना की प्रतीक्षा करने के बजाय 2011 के आंकड़ों का उपयोग करने का फैसला किया है। इसके पीछे सरकार का तर्क है कि वह महिला आरक्षण को जल्द से जल्द प्रभावी बनाना चाहती है। जनगणना के इंतजार में इस विधेयक को लटकाने के बजाय पुराने आधिकारिक आंकड़ों से ही काम शुरू करने की योजना बनाई गई है।

बढ़ जाएगी महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी

नारी शक्ति वंदन अधिनियम का मूल उद्देश्य राजनीति के शीर्ष स्तर पर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। अब तक लोकसभा में महिलाओं की संख्या बहुत कम रही है। इस विधेयक के लागू होने के बाद हर तीसरी सीट पर एक महिला सांसद या विधायक का होना अनिवार्य होगा। विपक्षी दल भी लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। हालांकि, सीटों की संख्या बढ़ाने और जनगणना के आधार को लेकर आने वाले सत्र में तीखी बहस होने के आसार हैं।

संसद के विशेष सत्र पर टिकीं सबकी निगाहें

आगामी तीन दिवसीय विशेष सत्र में यह विधेयक सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी सरकार इस मास्टरस्ट्रोक के जरिए देश की आधी आबादी को सीधा संदेश देना चाहती है। परिसीमन के जरिए सीटों की संख्या में वृद्धि करना एक जटिल प्रक्रिया है। लेकिन 2011 की जनगणना को आधार बनाकर सरकार ने कानूनी अड़चनों को कम करने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि सदन में इस नए समीकरण को कितना समर्थन मिलता है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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