भारत ने लिथियम-ग्रेफाइट सहित 19 खनिज ब्लॉकों की नीलामी शुरू की, मोबाइल और EV होंगे सस्ते

New Delhi News: स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और रक्षा क्षेत्र के लिए जरूरी खनिजों को लेकर भारत ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने 10 राज्यों में फैले 19 अहम खनिज ब्लॉकों की नीलामी का सातवां चरण शुरू कर दिया है। इनमें लिथियम, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे कीमती संसाधन शामिल हैं। अब तक इन खनिजों पर चीन का दबदबा रहा है। यह कदम उस पकड़ को कमजोर करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि ये खनिज भारत की अर्थव्यवस्था, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीक के लिए बेहद जरूरी हैं।

बिहार को सबसे ज्यादा फायदा, राजस्थान में लिथियम

इस नीलामीमें सबसे ज्यादा फायदा बिहार को मिला है। राज्य में चार खनिज ब्लॉक सामने आए हैं। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में तीन-तीन ब्लॉक नीलामी के लिए रखे गए हैं। राजस्थान और तेलंगाना में दो-दो ब्लॉक हैं। कर्नाटक, गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी अहम खनिजों की पहचान हुई है। राजस्थान में लिथियम और टंगस्टन जैसे खनिज मिलना खास माना जा रहा है। यही वे संसाधन हैं जो ईवी बैटरी और हाई-टेक उद्योग की रीढ़ होते हैं। इनकी घरेलू उपलब्धता से उत्पादन लागत घटने की उम्मीद है।

मोबाइल और इलेक्ट्रिक गाड़ियां होंगी सस्ती

अब तक भारत इन खनिजोंके लिए आयात पर निर्भर रहता था। इससे मोबाइल, बैटरी और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की लागत बढ़ जाती थी। अगर देश में ही इनका उत्पादन शुरू होता है तो कीमतों में कमी आ सकती है। यह कदम भारत को क्लीन एनर्जी सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी मजबूत करेगा। सरकार का मानना है कि इससे देश में विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी के लिए लिथियम सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल है।

कंपनियों के लिए आसान हुए नियम

सरकार नेनीलामी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नियमों में बदलाव किया है। अब कंपनियां बैंक गारंटी की जगह इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड का इस्तेमाल कर सकेंगी। इससे उनका वित्तीय बोझ कम होगा और ज्यादा कंपनियां इस रेस में हिस्सा ले सकेंगी। ई-नीलामी सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ी है और संसाधनों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा। नई नीति के तहत बोली प्रक्रिया 30 मार्च से शुरू होगी और 25 मई 2026 तक कंपनियां अपनी बोलियां जमा कर सकेंगी। यह कदम भारत को महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ी पहल है।

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories