शिमला के इन 2 अनाथ बच्चों ने किया ऐसा कमाल, डीसी को भी झुककर करना पड़ा सलाम! जानिए इनकी प्रेरणादायक कहानी

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से एक बेहद प्रेरणादायक खबर सामने आई है। यहां बेसहारा बच्चों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने दो होनहार छात्रों अमृत वर्मा और मोक्षित को सम्मानित किया है। इन दोनों बच्चों ने विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान बनाई है। जिला प्रशासन ने इनकी शानदार उपलब्धि पर शॉल और टोपी पहनाकर विशेष सम्मान दिया है।

नेत्रहीनों के लिए बनाई स्मार्ट छड़ी

अमृत वर्मा ने अपनी वैज्ञानिक सोच से सबको हैरान कर दिया है। उनका चयन राज्य स्तरीय इंस्पायर साइंस कार्यशाला के लिए हुआ है। उन्होंने नेत्रहीनों के लिए ‘स्मार्ट हेल्पिंग स्टिक’ का मॉडल तैयार किया है। इस छड़ी में विशेष सेंसर और वाइब्रेशन मोटर लगे हैं। यह छड़ी रास्ते की रुकावटों को पहचान कर तुरंत अलर्ट करती है। इस तकनीक की काम करने की रेंज एक से दो मीटर है। यह नया आविष्कार दिव्यांग लोगों को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाएगा।

केंद्र सरकार से मिला दस हजार का इनाम

अमृत के इस प्रोजेक्ट को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने बहुत सराहा है। विभाग ने अमृत को मॉडल तैयार करने के लिए दस हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी है। अमृत ने यह प्रपोजल आठवीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान भेजा था। अब वह धर्मशाला में होने वाली राज्य स्तरीय कार्यशाला में अपना मॉडल पेश करेंगे। उपायुक्त ने कहा कि छोटी उम्र में ऐसी वैज्ञानिक सोच विकसित होना काबिले तारीफ है।

मोक्षित को मिली बारह हजार की विशेष छात्रवृत्ति

दूसरे छात्र मोक्षित शर्मा ने भी शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी दर्ज की है। मोक्षित का चयन राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना के लिए हुआ है। इस योजना के माध्यम से उन्हें बारहवीं कक्षा तक पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति मिलेगी। सरकार की तरफ से उन्हें प्रति वर्ष बारह हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह छात्रवृत्ति गरीब मेधावी छात्रों को राज्य स्तरीय परीक्षा पास करने पर ही मिलती है।

मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना ने संवारा भविष्य

हिमाचल सरकार की मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना इन बच्चों के लिए बड़ा वरदान साबित हुई है। सरकार ने बेसहारा और निराश्रित बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का विशेष दर्जा दिया है। सरकार खुद इन बच्चों की अभिभावक बनकर इनके पालन-पोषण और शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी उठाती है। योजना के तहत बच्चों को मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य और रहने की अच्छी सुविधा दी जाती है। सरकार का मुख्य लक्ष्य इन बेसहारा बच्चों को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

जाखू स्कूल से निकलकर सफलता की ओर बढ़े कदम

अमृत और मोक्षित ने आठवीं तक की पढ़ाई जाखू के सरकारी स्कूल से पूरी की है। अब दोनों छात्र टूटीकंडी स्कूल में अपनी आगे की पढ़ाई कर रहे हैं। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बच्चों की इस सफलता को समाज के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बताया। इस सम्मान समारोह में जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पॉल भी मुख्य रूप से मौजूद रहीं। इन बच्चों की उपलब्धि ने सरकारी स्कूलों की शानदार गुणवत्ता को साबित कर दिया है।

विज्ञान के क्षेत्र में बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ावा

भारत सरकार का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग छात्रों में वैज्ञानिक सोच बढ़ाने का अहम काम करता है। ‘इंस्पायर’ योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों में रचनात्मकता और नई खोज की भावना को पैदा करना है। सरकार देश के होनहार छात्रों को उनके शानदार विचारों के लिए आर्थिक मदद प्रदान करती है। अमृत के इस चयन से दूरदराज क्षेत्रों के अन्य बच्चों को भी विज्ञान में आगे बढ़ने का हौसला मिलेगा।

कौशल विकास और रोजगार के अवसर दे रही सरकार

सुख आश्रय योजना केवल बुनियादी सुविधाएं नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य को भी सुरक्षित करती है। सरकार इन होनहार बच्चों को कौशल विकास और बेहतरीन रोजगार के कई नए अवसर प्रदान करती है। बच्चों को नियमित आर्थिक मदद दी जाती है ताकि वे अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा कर सकें। उच्च शिक्षा हासिल करने, शादी करने या अपना व्यापार शुरू करने के लिए भी सरकार पूरी मदद करती है।

समाज में समावेशिता और मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण

हिमाचल सरकार की यह योजना समाज में मानवता का एक बहुत ही शानदार उदाहरण है। यह पहल बेसहारा बच्चों को सुरक्षा देने के साथ उनका आत्मविश्वास भी काफी बढ़ाती है। सरकार के इस कदम से अनाथ बच्चे अब किसी भी हीन भावना का शिकार नहीं होते हैं। वे हिम्मत के साथ अपने सुनहरे भविष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। राज्य सरकार की यह कल्याणकारी योजना पूरे देश के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत बन गई है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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