मनीष सिसोदिया की बढ़ी मुश्किलें! हिमाचल की अदालत ने मानहानि मामले में भेजा समन, 12 मई को होना होगा पेश

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले की एक अदालत ने आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया को समन जारी किया है। यह कार्रवाई ‘आप’ के ही पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनूप केसरी की ओर से दायर मानहानि मामले में की गई है। अदालत ने मंगलवार को सिसोदिया को कड़ा निर्देश देते हुए 12 मई को निजी तौर पर पेश होने को कहा है। इस कानूनी घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर भारी हलचल पैदा कर दी है।

AAP छोड़ते ही शुरू हुआ था आरोपों का दौर

यह पूरा विवाद साल 2022 का है जब अनूप केसरी आम आदमी पार्टी की हिमाचल इकाई के अध्यक्ष थे। केसरी ने उस समय पार्टी की कार्यप्रणाली से नाराज होकर अपने समर्थकों सहित ‘आप’ को अलविदा कह दिया था। इसके तुरंत बाद वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे। केसरी का आरोप है कि उनके इस फैसले से मनीष सिसोदिया काफी हताश हो गए थे। इसी हताशा में सिसोदिया ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।

दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लगाए थे गंभीर आरोप

अनूप केसरी ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया है कि सिसोदिया ने उन्हें सार्वजनिक रूप से बदनाम किया। आरोप है कि 9 अप्रैल 2022 को मनीष सिसोदिया ने दिल्ली में एक विशेष संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया था। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिसोदिया ने केसरी पर कई गंभीर और आपत्तिजनक आरोप लगाए थे। केसरी के मुताबिक, उन पर लगाए गए इन आरोपों को साबित करने के लिए सिसोदिया ने एक भी ठोस सबूत पेश नहीं किया।

चरित्र हनन के खिलाफ ऊना की अदालत में दी चुनौती

पेशा से वकील अनूप केसरी ने सिसोदिया के इस कृत्य को सीधे तौर पर “चरित्र हनन” करार दिया है। उनका कहना है कि बिना किसी सबूत के सार्वजनिक मंच से अपमानजनक बातें कहना कानूनन अपराध है। इसी अपमान का बदला लेने और अपनी छवि साफ करने के लिए उन्होंने ऊना की अदालत का रुख किया। उन्होंने मांग की है कि सिसोदिया के खिलाफ मानहानि की धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

12 मई को सिसोदिया को देना होगा स्पष्टीकरण

अदालत ने केसरी की दलीलों को प्राथमिक रूप से सही पाते हुए सिसोदिया को तलब किया है। अब 12 मई को मनीष सिसोदिया को अदालत के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा। यदि वे इन आरोपों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं, तो उन पर कानूनी शिकंजा और कस सकता है। ‘आप’ के लिए यह स्थिति काफी असहज हो गई है क्योंकि उनके बड़े नेता अब एक पूर्व सहयोगी के जरिए ही कानूनी लड़ाई में घिर गए हैं।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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