हिमाचल में शिक्षकों के तबादलों पर भारी सस्पेंस! मंत्री के दफ्तर में डीओ नोट का अंबार, जानिए सरकार का अगला कदम

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में शिक्षकों के तबादलों को लेकर मची होड़ ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि इस शैक्षणिक सत्र में तबादलों पर लगा प्रतिबंध नहीं हटेगा। बावजूद इसके शिक्षा मंत्री के कार्यालय में सात सौ से अधिक आवेदन पहुंच चुके हैं। विभाग ने अब पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। सरकार ने निर्णय लिया है कि केवल बेहद जरूरी मामलों में ही ट्रांसफर किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी गई पांच सौ फाइलें

तबादलों पर कड़े प्रतिबंध के चलते शिक्षा मंत्री के कार्यालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने पांच सौ आवेदनों की फाइल बनाकर मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दी है। फिलहाल दो सौ नए आवेदन अभी भी कतार में हैं। जेबीटी, टीजीटी और प्रधानाचार्य सहित कई श्रेणियों के शिक्षक ट्रांसफर की मांग कर रहे हैं। विभाग अब सिर्फ ‘नीड बेस्ड’ मामलों पर ही विचार कर रहा है। बिना ठोस कारण के किसी भी शिक्षक का तबादला नहीं किया जाएगा।

सीबीएसई स्कूलों के कारण नहीं हटा प्रतिबंध

शिक्षा विभाग ने तबादलों पर रोक जारी रखने के पीछे एक ठोस तर्क दिया है। प्रदेश के 158 सरकारी स्कूलों को अब सीबीएसई से संबद्ध किया गया है। इन स्कूलों में छप्पन सौ से ज्यादा शिक्षकों की नियुक्तियां होनी बाकी हैं। विभाग का मानना है कि यदि अभी प्रतिबंध हटाया गया, तो इसका बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ेगा। विभाग सबसे पहले इन विशेष स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करेगा। इसके बाद ही कोई नई नीति बनेगी।

एसएमसी शिक्षकों के मर्ज होने का रास्ता साफ

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने एसएमसी शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। उन्होंने इन शिक्षकों को विभाग में मर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। पांच प्रतिशत एलडीआर कोटे के तहत इन शिक्षकों का समायोजन किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इसके लिए परीक्षा का परिणाम भी घोषित कर दिया है। सरकार चाहती है कि पंचायत चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले यह पूरी कानूनी प्रक्रिया संपन्न हो जाए।

अस्सी हजार शिक्षकों के भविष्य पर टिकी नजरें

वर्तमान में हिमाचल शिक्षा विभाग में लगभग अस्सी हजार शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं। इनमें सहायक आचार्य से लेकर जेबीटी और डीपीई तक सभी शामिल हैं। बीच सत्र में तबादले होने से स्कूलों की व्यवस्था चरमरा जाती है। इसीलिए विभाग ने इस बार कड़ा रुख अपनाया है। शिक्षक संगठनों की नजरें अब मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी हैं। सरकार किसी भी तरह के बड़े विवाद से बचने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories