हिमाचल में अप्रैल महीने में लौटा दिसंबर: 853% ज्यादा बारिश और बर्फबारी से कांपा प्रदेश, 1 की मौत

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मौसम ने अचानक भयंकर करवट ली है। अप्रैल के महीने में दिसंबर जैसी कड़ाके की ठंड लौट आई है। ऊपरी इलाकों में भारी बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में झमाझम बारिश हुई है। इसने जनजीवन को बुरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। पिछले चौबीस घंटों में राज्य में सामान्य से आठ सौ तिरपन फीसदी अधिक बारिश दर्ज हुई है। इस बेमौसमी बर्फबारी और बारिश के कारण तापमान में बारह डिग्री तक की भारी गिरावट आई है।

सड़कें और बिजली ठप, अस्पताल जाते बुजुर्ग ने तोड़ा दम

खराब मौसम का सबसे बुरा असर परिवहन और बिजली सेवाओं पर पड़ा है। भारी बर्फबारी के कारण दो नेशनल हाईवे समेत पचहत्तर प्रमुख सड़कें पूरी तरह बंद हो गई हैं। इसके अलावा आठ सौ चौरासी बिजली ट्रांसफार्मर भी ठप पड़ गए हैं। चंबा जिले में सड़क बंद होने से एक बेहद दुखद घटना घटी। वहां इलाज के लिए मंडी जा रहे एक बुजुर्ग मरीज की रास्ते में ही हृदयघात से दर्दनाक मौत हो गई।

शिकारी देवी और रोहतांग में भारी बर्फबारी का कहर

शिकारी देवी क्षेत्र में सबसे ज्यादा सत्तर सेंटीमीटर तक ताजा बर्फ गिरी है। रोहतांग टनल और जलोड़ी दर्रा में तीस सेंटीमीटर बर्फबारी दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार शिमला के कुफरी में दो साल बाद अप्रैल में बर्फ गिरी है। मनाली-केलांग मार्ग पर सोलंगनाला से आगे सिर्फ फोर बाई फोर गाड़ियों को ही जाने की इजाजत मिली है। धर्मशाला सहित कांगड़ा में घने कोहरे के कारण दिन में भी वाहनों की लाइट जलानी पड़ी।

पांच जिलों में आंधी और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी

बारिश के मामले में सोलन में चोवन मिलीमीटर और कांगड़ा में पैंतालीस मिलीमीटर पानी बरसा। बिलासपुर और मंडी में भी लगातार भारी बारिश हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र ने चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला में गुरुवार के लिए तेज आंधी का येलो अलर्ट जारी किया है। शुक्रवार को भी किन्नौर और लाहौल-स्पीति में मौसम खराब रहने की पूरी संभावना है। मौसम विभाग ने तेरह अप्रैल से प्रदेश में मौसम पूरी तरह साफ होने का अनुमान जताया है।

फसलों पर संकट, सेब और गेहूं को भारी नुकसान

इस अचानक बदले मौसम ने किसानों की चिंताएं बहुत अधिक बढ़ा दी हैं। बेमौसमी बर्फबारी और बारिश से सेब, गेहूं, आम और लीची की फसल को नुकसान हो रहा है। सेब के बगीचों में अभी फ्लावरिंग का बेहद महत्वपूर्ण समय चल रहा है। इस अहम प्रक्रिया के लिए बाइस से पच्चीस डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त रहता है। लेकिन बेतहाशा ठंड और तेजी से गिरते तापमान ने प्रदेश के सेब उत्पादकों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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