हिमाचल में सफर होगा सुहाना: ऊना-रानीताल हाईवे पर दौडेंगी गाड़ियां, फोरलेन प्रोजेक्ट में आया बड़ा अपडेट

Himachal News: ऊना मैहतपुर से रानीताल जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 503 पर सफर अब बेहद आसान होने वाला है। इस महत्वपूर्ण मार्ग को फोरलेन में बदलने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य लोक निर्माण विभाग ने हाल ही में यह हाईवे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सौंप दिया है। अब इस मेगा प्रोजेक्ट का जिम्मा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी को देने की प्रक्रिया चल रही है। इससे स्थानीय लोगों को भारी ट्रैफिक जाम से बहुत बड़ी राहत मिलेगी।

तीन विस्तृत रिपोर्ट तय करेंगी परियोजना की कुल लागत

इस बड़े प्रोजेक्ट की लागत का सही अनुमान लगाने के लिए पीएमसी तीन विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करेगी। इन तीनों रिपोर्ट को अंतिम मंजूरी के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद ही निर्माण का अगला अहम चरण शुरू होगा। आपको बता दें कि साल 2009 से इस राष्ट्रीय राजमार्ग की पूरी जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग के पास थी।

दूरी घटेगी और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया होगी शुरू

लोक निर्माण विभाग ने फोरलेन निर्माण के लिए शुरुआती सर्वेक्षण का काम पहले ही पूरा कर लिया है। अधिकारियों का अनुमान है कि नई अलाइनमेंट के बाद इस मार्ग की दूरी 80 से 85 किलोमीटर रह जाएगी। एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर भूपिंदर सिंह ने अगले महीने तक पीएमसी को काम सौंपने की उम्मीद जताई है। सब कुछ सही रहा तो इस साल के अंत तक जमीन अधिग्रहण की अहम प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।

राजस्व विभाग निभाएगा अहम भूमिका, तय होगा सही मुआवजा

प्रस्तावित फोरलेन के लिए जमीन अधिग्रहण वास्तव में एक बेहद जटिल और लंबी चलने वाली प्रक्रिया है। इसमें हिमाचल प्रदेश सरकार का राजस्व विभाग एनएचएआई का हर संभव तरीके से पूरा सहयोग करेगा। जमीन की सटीक पैमाइश करने से लेकर किसानों के लिए उचित मुआवजे का निर्धारण राजस्व अधिकारी ही करेंगे। इसके लिए जल्द ही विभाग की तरफ से आधिकारिक टेंडर प्रक्रिया भी विधिवत रूप से शुरू होने वाली है।

भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार तय होगी सड़क की असली चौड़ाई

सामान्य तौर पर टू लेन सड़क की चौड़ाई 22.5 मीटर और फोरलेन की चौड़ाई 45 मीटर होती है। इसमें वाहनों के लिए डिवाइडर और आम लोगों के लिए सर्विस रोड की जगह भी शामिल रहती है। लेकिन ऊना-रानीताल हाईवे की वास्तविक चौड़ाई यहां की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों पर काफी हद तक निर्भर करेगी। मिट्टी की किस्म और पहाड़ों की स्थिति को देखते हुए कई जगहों पर जरूरी बदलाव किए जाएंगे।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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