Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव का बिगुल बजने वाला है। राज्य में चुनावी रोस्टर जारी होते ही गांवों में राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। प्रदेश उच्च न्यायालय के सख्त आदेश के बाद सभी जिलों का नया आरक्षण रोस्टर सामने आ गया है। अब चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। सभी संभावित उम्मीदवारों को अब सिर्फ औपचारिक घोषणा का इंतजार है। राज्य निर्वाचन आयोग बीस अप्रैल तक पंचायत चुनावों की आधिकारिक घोषणा कर सकता है।
तीन चरणों में हो सकते हैं चुनाव, तैयारियां तेज
सूत्रों के अनुसार राज्य में पंचायत चुनाव तीन चरणों में आयोजित हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनावी तारीखों के एलान से पहले राज्य निर्वाचन आयोग कई अहम बैठकें करेगा। पंचायती राज विभाग और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चुनावी तैयारियों की गहन समीक्षा होगी। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण और पारदर्शी हो। इसके लिए सभी जिलों में चुनाव अधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
कांग्रेस और भाजपा ने कसी कमर, जिला परिषद पर नजर
चुनावी सुगबुगाहट के बीच सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा ने अपनी कमर कस ली है। दोनों राजनीतिक दलों के लिए यह पंचायत चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। हालांकि ये चुनाव किसी पार्टी के चुनाव चिह्न पर नहीं लड़े जाते हैं। इसके बावजूद दोनों दल अपनी विचारधारा वाले उम्मीदवारों को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे। सबसे ज्यादा जोर आजमाइश जिला परिषद की सीटों के लिए होगी। दोनों पार्टियां जिला परिषद चेयरमैन की कुर्सी पर अपना कब्जा जमाना चाहती हैं।
कब्जाधारियों और नशा तस्करों के चुनाव लड़ने पर सख्त रोक
इस बार पंचायत चुनाव में आपराधिक छवि वाले लोग हिस्सा नहीं ले पाएंगे। जिन लोगों ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया है, वे चुनाव लड़ने के अयोग्य होंगे। भ्रष्टाचार के मामलों में शामिल पूर्व प्रधान और सदस्य भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यदि कोई व्यक्ति चिट्टे की तस्करी में पकड़ा गया है और आरोप साबित हो गया है, तो उसे भी बाहर किया जाएगा। विभाग ऐसे लोगों का रिकॉर्ड बना रहा है। अनापत्ति प्रमाण पत्र जरूरी है।
हाई कोर्ट के फैसले ने तोड़े कई उम्मीदवारों के सपने
पंचायत चुनाव के लिए जारी नए आरक्षण रोस्टर ने कई लोगों के राजनीतिक सपने तोड़ दिए हैं। इससे पहले जिला उपायुक्तों ने सरकार की पांच प्रतिशत शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए रोस्टर जारी किया था। लेकिन हाई कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद इस पूरी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया। पहले जो पंचायतें अनारक्षित श्रेणी में थीं, वे नए रोस्टर के बाद आरक्षित हो गई हैं। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में भी यही नियम लागू हुआ है।

