Himachal News: हिमाचल प्रदेश में शराब ठेकों की नीलामी प्रक्रिया अंतिम चरण में है। आबकारी विभाग ने 95 प्रतिशत लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। कुल 2125 ठेकों में से 2018 की ऑनलाइन नीलामी पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद शिमला और मंडी में कारोबारी ठेके लेने से पीछे हट गए हैं। इसके चलते करीब 100 ठेकों पर अब भी ताले लटके हुए हैं। आबकारी विभाग के सामने इन खाली ठेकों को बेचने की बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
बेस प्राइस बढ़ने से कारोबारियों ने खींचे अपने हाथ
आबकारी विभाग को शिमला के 80 और मंडी के 20 ठेकों के खरीदार नहीं मिले हैं। सरकार ने शराब ठेकों के बेस प्राइस में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि अधिक कीमतों के कारण मुनाफे की कोई गुंजाइश नहीं है। बिक्री और लागत का संतुलन नहीं बनने के कारण पुराने कारोबारी भी पीछे हट रहे हैं। परेशान विभाग इन बचे हुए ठेकों के लिए अब हर रोज नई ऑनलाइन निविदाएं आमंत्रित कर रहा है।
कुल्लू और लाहौल-स्पीति में बाहरी कंपनी का बड़ा दांव
कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिलों में शराब ठेकों की नीलामी स्थिति काफी अलग रही। इन दोनों जिलों के सभी शराब ठेकों को तेलंगाना की एक निजी कंपनी ने हासिल कर लिया है। इससे यह साफ हो गया है कि स्थानीय लोगों की जगह बाहरी कंपनियां कारोबार के लिए तैयार हैं। आबकारी विभाग के अधिकारी बचे हुए 105 ठेकों के जल्द आवंटन की उम्मीद जता रहे हैं। नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही पूरी व्यवस्था को सुचारू बनाने की तेज कोशिश जारी है।
राजस्व का नया लक्ष्य और आबकारी नीति में बड़ा बदलाव
राज्य सरकार ने इस साल ठेकों की नीलामी से 2900 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है। पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार को 2800 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इस बार आबकारी विभाग ने अपनी नीति में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। पुराने ठेकेदारों को अतिरिक्त दिन काम करने की अनुमति नहीं दी गई है। इसके साथ ही सरकारी उपक्रमों को भी शराब के ठेके चलाने की जिम्मेदारी इस बार बिल्कुल नहीं दी जा रही है।


