हिमाचल में थमे एंबुलेंस के पहिए, मरीजों की सांसों पर मंडराया संकट! जानिए क्यों बारिश में धरने पर बैठे कर्मचारी

Himachal News: हिमाचल में स्वास्थ्य व्यवस्था बड़े संकट से गुजर रही है। राज्य में 108 और 102 एंबुलेंस सेवा के पहिए पूरी तरह थम गए हैं। कर्मचारियों ने लगातार तीसरे दिन भी अपनी प्रदेशव्यापी हड़ताल जारी रखी है। इस हड़ताल के कारण बीमार मरीजों को बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है। कर्मचारी भारी बारिश में भी शिमला सचिवालय के बाहर धरने पर डटे हुए हैं। एंबुलेंस सेवाएं ठप होने से राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह चरमरा गई है।

न्यूनतम वेतन और ओवरटाइम को लेकर पनपा भारी आक्रोश

सीटू के बैनर तले एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन यह जोरदार आंदोलन कर रही है। यूनियन ने नेशनल हेल्थ मिशन के अधिकारियों पर गंभीर शोषण का आरोप लगाया है। मेडस्वान फाउंडेशन अपने पायलट और कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन तक नहीं दे रहा है। कंपनी इन कर्मचारियों से रोजाना बारह घंटे की लंबी ड्यूटी करवा रही है। इतनी कड़ी मेहनत के बावजूद कंपनी इन्हें किसी ओवरटाइम का भुगतान नहीं करती है। लगातार हो रहे इस अन्याय से एंबुलेंस कर्मचारियों में भारी गुस्सा भड़क उठा है।

अदालती आदेशों की अनदेखी और कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न

सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने अधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। अदालतें कर्मचारियों के हक में अहम फैसले सुना चुकी हैं। उच्च न्यायालय और लेबर कोर्ट ने भी स्पष्ट आदेश जारी किए हैं। इसके बावजूद कंपनी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं कर रही है। प्रबंधन अपनी मांग उठाने वाले कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है। अधिकारी उनका बेवजह तबादला कर देते हैं या उन्हें जानबूझकर ड्यूटी से बाहर निकाल देते हैं।

पीएफ घोटाले का आरोप और पुरानी कंपनी के बकाए की मांग

एंबुलेंस यूनियन ने ईपीएफ और ईएसआई योजनाओं में भी भारी खामियों का पर्दाफाश किया है। कर्मचारियों ने पुरानी कंपनी जीवीके पर बकाया पैसे न देने का आरोप लगाया है। कंपनी ने सेवा समाप्ति पर मिलने वाला छंटनी भत्ता और ग्रेच्युटी का पैसा रोक लिया है। कर्मचारी लगातार अपनी सेवा की निरंतरता और वरिष्ठता का लाभ देने की मांग कर रहे हैं। इन सभी वित्तीय अनियमिताओं के कारण गरीब कर्मचारियों का जीवन बहुत भारी आर्थिक संकट में पड़ गया है।

मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी

हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें पूरी मजबूती से रखी हैं। वे प्रशासन से सरकारी नियमों के अनुसार तुरंत न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों ने बारह घंटे की ड्यूटी पर डबल ओवरटाइम का पूरा भुगतान भी मांगा है। उन्होंने प्रशासन से नियमानुसार छुट्टियां देने और अदालती आदेशों को लागू करने की अपील की है। यूनियन ने मांगें पूरी नहीं होने पर इस बड़े आंदोलन को ज्यादा तेज करने की चेतावनी दी है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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