Himachal News: हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल शुक्रवार को खत्म हो गई। यह हड़ताल लगातार पांच दिनों तक चली थी। सीटू यूनियन के बैनर तले कर्मचारियों ने शिमला में राज्य सचिवालय के बाहर महापड़ाव डाला था। भारी बारिश और कड़ाके की ठंड के बावजूद कर्मचारी डटे रहे। इस हड़ताल के कारण पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। एनएचएम प्रबंधन के लिखित आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने फिलहाल अपना आंदोलन वापस लिया है।
एनएचएम कार्यालय पर प्रदर्शन और प्रबंधन से वार्ता
हड़ताल के अंतिम दिन कर्मचारियों ने शिमला के कुसुंपटी स्थित नेशनल हेल्थ मिशन कार्यालय तक पैदल मार्च किया। वहां उन्होंने करीब दो घंटे तक जोरदार धरना दिया। इसके बाद यूनियन नेताओं ने एनएचएम के उपनिदेशक के साथ एक अहम बैठक की। बैठक में उपनिदेशक ने एक सप्ताह के भीतर विवाद सुलझाने का पक्का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि निकाले गए कर्मचारियों की बहाली होगी। इसके अलावा भविष्य में किसी भी कर्मचारी का मानसिक उत्पीड़न नहीं किया जाएगा।
मेड्सवान फाउंडेशन पर लगे शोषण के गंभीर आरोप
धरने को संबोधित करते हुए सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने प्रबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मेड्सवान फाउंडेशन कर्मचारियों का भारी शोषण कर रहा है। सभी एंबुलेंस पायलट और ईएमटी से हर दिन बारह घंटे तक लगातार काम लिया जाता है। इसके बावजूद उन्हें ओवरटाइम का एक भी पैसा नहीं मिलता। कई कर्मचारियों को तो सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जा रहा। इस रवैये से कर्मचारियों में भारी रोष पनप रहा है।
अदालती आदेशों की अनदेखी और कर्मचारियों की प्रताड़ना
यूनियन नेताओं ने प्रबंधन पर अदालतों की अवमानना का बड़ा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट और लेबर कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बाद भी मांगें नहीं मानी गईं। आवाज उठाने वाले कर्मचारियों का तुरंत तबादला कर दिया जाता है। उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। कई लोगों को बिना कारण महीनों तक ड्यूटी से बाहर रखा गया है। कर्मचारियों के ईपीएफ और ईएसआई खातों में भी भारी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं।
लंबित भत्तों का भुगतान और आगे की रणनीति
कर्मचारियों ने पुरानी कंपनी जीवीके ईएमआरआई के समय के भत्ते भी मांगे हैं। उन्हें सेवा समाप्ति के बाद अब तक ग्रेच्युटी और छंटनी भत्ता नहीं मिला है। यूनियन ने साफ कर दिया है कि कर्मचारियों को तुरंत न्यूनतम वेतन दिया जाए। बारह घंटे काम करने पर डबल ओवरटाइम मिलना चाहिए। अगर सरकार और प्रबंधन ने एक सप्ताह में मांगें पूरी नहीं कीं। तो कर्मचारी फिर से सड़कों पर उतरेंगे। इसके बाद राज्य में एक निर्णायक और उग्र आंदोलन होगा।
मरीजों की परेशानी और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
एंबुलेंस कर्मचारियों की इस हड़ताल ने पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को हिला दिया था। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचने में सबसे ज्यादा दिक्कतें आईं। निजी वाहनों से अस्पताल जाने के लिए लोगों को भारी किराया चुकाना पड़ा। फिलहाल हड़ताल टलने से जनता और सरकार दोनों ने बड़ी राहत की सांस ली है। स्वास्थ्य सेवाएं अब धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही हैं।

