Himachal News: हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ एक बहुत सख्त कार्रवाई हुई है। पुलिस विभाग ने नशा तस्करों से संबंध रखने वाले 16 पुलिसकर्मियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने मंगलवार को शिमला में यह चौंकाने वाला खुलासा किया। इन पुलिसकर्मियों पर तस्करों के साथ मिलीभगत करने और एनडीपीएस एक्ट के गंभीर आरोप लगे थे। इस अचानक हुई कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में भारी हड़कंप मच गया है।
मुख्यमंत्री के जन आंदोलन का दिखने लगा बड़ा असर
डीजीपी अशोक तिवारी ने इस कार्रवाई को बहुत जरूरी बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने चिट्टे के खिलाफ कड़ा जन आंदोलन शुरू किया था। अब इस विशेष अभियान के बहुत बेहतर परिणाम लोगों के सामने आ रहे हैं। डीजीपी ने भ्रष्ट कर्मचारियों को बेहद सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने बेबाकी से कहा कि हाथ की पांचों उंगलियां कभी बराबर नहीं होती हैं। जो भी पुलिसकर्मी इस धंधे में शामिल मिलेगा, उसे किसी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा।
नशे को जड़ से खत्म करने के लिए तीन स्तरीय रणनीति
हिमाचल पुलिस अब नशे को खत्म करने के लिए नई तीन स्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। पुलिस सबसे पहले प्रदेश के युवाओं को नशे के खिलाफ लगातार जागरूक कर रही है। दूसरे स्तर पर सभी नशा तस्करों के खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई जारी है। तीसरे चरण में नशे के शिकार लोगों को नशामुक्ति केंद्रों में भेजा जा रहा है। पुलिस इन युवाओं का सुरक्षित पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए काफी गंभीरता से अपने कदम उठा रही है।
चर्चित चेस्टर हिल मामले पर डीजीपी ने साधी चुप्पी
शिमला के बहुचर्चित चेस्टर हिल मामले पर मीडिया ने पुलिस महानिदेशक से कई अहम सवाल पूछे। डीजीपी अशोक तिवारी ने इस विवादित मुद्दे पर अपनी बहुत सधी हुई प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस गंभीर मामले में कोई भी टिप्पणी करने से बिल्कुल साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संबंधित विभाग इस घटना की गहन जांच कर रहे हैं। यदि राज्य सरकार पुलिस को कोई विशेष जिम्मेदारी सौंपती है, तो विभाग उसे पूरी ईमानदारी से निभाएगा।

