Himachal News: हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब सरकारी और शामलात भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले लोग पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसके साथ ही चिट्टा और हेरोइन तस्करी में चार्जशीट हुए आरोपियों पर भी चुनाव लड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। निर्वाचन आयोग ने इन नए नियमों को लागू करने के लिए अपनी चुनावी तैयारियां काफी तेज कर दी हैं। यह फैसला स्वच्छ राजनीति के लिए लिया गया है।
अवैध कब्जा करने वालों के पूरे परिवार पर लगा बड़ा प्रतिबंध
राज्य सरकार के नए निर्देशों के अनुसार अवैध कब्जा करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ सरकारी या सामुदायिक भूमि पर कब्जे का राजस्व रिकॉर्ड मौजूद है, तो वह चुनाव नहीं लड़ सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि उस अतिक्रमणकारी के परिवार का कोई भी सदस्य चुनावी मैदान में नहीं उतर सकेगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य भूमि अतिक्रमण जैसे गंभीर मामलों में शामिल लोगों को सार्वजनिक प्रतिनिधित्व और सत्ता से पूरी तरह दूर रखना है।
नशा तस्कर और शामलात जमीन हड़पने वाले नहीं बन पाएंगे प्रधान
ग्रामीण क्षेत्रों में शामलात जमीन का उपयोग हमेशा सामुदायिक कार्यों के लिए किया जाता है। इस भूमि पर अवैध कब्जों को लंबे समय से एक गंभीर समस्या माना जाता रहा है। अब नए नियम से पंचायतों में ऐसे अवैध कब्जों को बिल्कुल बढ़ावा नहीं मिलेगा। इसके अलावा चुनाव प्रक्रिया को अपराधमुक्त बनाने के लिए नशा तस्करों पर भी सख्ती दिखाई गई है। अदालत द्वारा चिट्टा या हेरोइन जैसे मादक पदार्थों की तस्करी में चार्जशीट हुए व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
विधानसभा में पास हुआ खास बिल, अब सिर्फ राज्यपाल की मुहर का इंतजार
पंचायत स्तर पर अपराध और नशे के बढ़ते प्रभाव को जड़ से खत्म करने के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के हालिया बजट सत्र में इस संबंध में एक विशेष बिल भी पारित हो चुका है। चिट्टा और हेरोइन तस्करी में चार्जशीट हुए व्यक्ति को रोकने वाला यह बिल अब राज्यपाल की अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया है। राज्यपाल की मुहर लगते ही यह नया कानून आगामी पंचायत चुनावों में पूरी तरह से लागू हो जाएगा।

