Himachal News: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने दलबदल कानून के तहत अयोग्य घोषित विधायकों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने विधानसभा सचिव को पूर्व विधायक राजेंद्र राणा और रवि ठाकुर की रुकी पेंशन का भुगतान करने का सख्त आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सात अप्रैल 2026 से एक महीने के भीतर इन दोनों नेताओं को उनका बकाया मिल जाना चाहिए। यह अहम फैसला राज्य सरकार के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।
देरी होने पर देना होगा छह प्रतिशत ब्याज
न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और रंजन शर्मा की खंडपीठ ने याचिका पर अपना अहम फैसला सुनाया। अदालत ने आदेश में साफ चेतावनी दी है। खंडपीठ ने कहा कि यदि एक महीने में पेंशन का भुगतान नहीं हुआ, तो विधानसभा सचिव इसके लिए जिम्मेदार होंगे। सचिव को बकाया राशि देय होने की तिथि से अंतिम भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज देना होगा। अदालत के इस सख्त आदेश की प्रति शुक्रवार को सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध करा दी गई है।
नए कानून के दायरे से बाहर हैं याचिकाकर्ता
पूर्व विधायकों ने याचिका में बताया कि सरकार ने पेंशन संशोधन विधेयक वापस ले लिया है। विधानमंडल ने नया विधेयक पारित किया है। नए कानून के तहत 14वीं विधानसभा या उसके बाद अयोग्य घोषित सदस्यों को पेंशन नहीं मिलेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह नया कानून केवल 14वीं विधानसभा के बाद वाले विधायकों पर लागू होता है। दोनों याचिकाकर्ता 12वीं और 13वीं विधानसभा में चुने गए थे। इसलिए अदालत ने इन्हें पिछली अवधि की पेंशन का हकदार माना है।
अन्य अयोग्य विधायकों को नहीं मिलेगा पेंशन लाभ
हालिया सत्र में पारित नए विधेयक का सीधा असर कई अन्य नेताओं पर पड़ेगा। गगरेट से चैतन्य शर्मा और कुटलेहर से देवेंद्र भुट्टो जैसे विधायकों को अब पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। ये नेता भी उन छह अयोग्य विधायकों में शामिल हैं, जिन्हें विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने मार्च 2024 में निलंबित किया था। रवि ठाकुर और राजेंद्र राणा 2024 का विधानसभा उपचुनाव हार गए थे। इसलिए उन्हें 14वें विधानसभा कार्यकाल के लिए कोई भी पेंशन नहीं दी जाएगी।
क्रॉस वोटिंग के कारण गई थी इन विधायकों की सदस्यता
इन विधायकों ने फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में अपनी पार्टी से बगावत की थी। उन्होंने कांग्रेस में रहते हुए भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी। साथ ही बजट कार्यवाही में पार्टी व्हिप का खुला उल्लंघन भी किया था। इसी कारण इन्हें अयोग्य घोषित किया गया था। वहीं सुधीर शर्मा और इंदर दत्त लखनपाल भाजपा के टिकट पर दोबारा चुनाव जीत गए हैं। इसलिए ये दोनों नेता नए पेंशन प्रावधानों के असर से सुरक्षित रहेंगे।

