Himachal News: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने प्रदेश के हजारों वर्कचार्ज कर्मचारियों के भविष्य को लेकर बेहद अहम और निर्णायक निर्देश जारी किए हैं। वित्त विनियमन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को ध्यान में रखते हुए नई नीति स्पष्ट कर दी है। अब वर्कचार्ज के रूप में दी गई सेवा को कर्मचारी के रिटायरमेंट और पेंशन लाभों के लिए गिना जाएगा। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि इन लाभों का असली हकदार कर्मचारी तभी होगा जब उसकी सेवाएं पूरी तरह नियमित हो जाएंगी।
पेंशन और रिटायरमेंट लाभों में मिलेगी बड़ी मदद
वित्त विभाग के नए निर्देशों के मुताबिक वर्कचार्ज अवधि को अब सेवा गणना (Service Counting) का हिस्सा माना जाएगा। यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है जो लंबे समय से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे। इससे रिटायरमेंट के समय मिलने वाले वित्तीय लाभों में काफी सुधार होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमितीकरण के बाद ही यह प्रभावी होगा। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी अब वर्कचार्ज स्टेटस देने का विशेष प्रावधान किया गया है।
वेतन वृद्धि और अन्य भत्तों पर सरकार का रुख स्पष्ट
वर्कचार्ज कर्मचारियों के वेतनमान को लेकर सरकार ने कुछ कड़े नियम भी सामने रखे हैं। इन कर्मचारियों को वर्तमान में किसी भी प्रकार की वार्षिक वेतन वृद्धि (Increment) का अधिकार नहीं होगा। उन्हें केवल उनके पद के लिए निर्धारित न्यूनतम वेतनमान के अनुसार ही भुगतान किया जाएगा। नियमित कर्मचारियों की तरह अन्य सभी भत्ते और सेवा लाभ भी नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मिलने शुरू होंगे। वित्त विभाग ने अधिकारियों को इन आदेशों का सख्ती से पालन करने को कहा है।
अदालती फैसलों पर अनुचित टिप्पणी करना पड़ेगा भारी
राज्य सरकार ने अदालती मामलों के संदर्भ में अधिकारियों के रवैये पर भी गहरी नाराजगी जताई है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने एक सख्त निर्देश जारी कर अधिकारियों को शालीन भाषा का उपयोग करने की हिदायत दी है। सरकार के संज्ञान में आया था कि कुछ अधिकारी अदालतों के फैसलों पर अनावश्यक और आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे हैं। मुख्य सचिव ने इसे सीधे तौर पर ‘न्यायालय की अवमानना’ की श्रेणी में रखने की चेतावनी दी है।
शालीन और विनम्र पत्राचार सुनिश्चित करने के निर्देश
प्रशासनिक अधिकारियों को अब अदालती पत्राचार में पूरी तरह से विनम्र और सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करना होगा। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि न्यायालयों की गरिमा को किसी भी हाल में ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। किसी भी फैसले को हल्के में लेना या उस पर गैर-जरूरी सवाल उठाना अब अनुशासनहीनता माना जाएगा। सभी विभागाध्यक्षों और प्रशासनिक सचिवों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि उनके अधीनस्थ कर्मचारी इन नियमों का कड़ाई से पालन करें।

