Himachal News: बड़सर नगर पंचायत के गठन का बड़ा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। हिमाचल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को सही माना था। हाई कोर्ट ने असंतुष्ट पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मियां बहुत तेज हो गई हैं। यह मामला अब फिर से चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।
भेदभाव का आरोप लगाकर इन लोगों ने किया केस
असंतुष्ट पक्ष ने सरकार पर गठन में भारी भेदभाव करने का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ताओं में बलबीर सिंह बनयाल और पूर्व बीडीसी सदस्य मुकेश बनयाल मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके साथ पूर्व उपप्रधान राजपाल, पूर्व वार्ड पंच पवन कुमार, सरोज कुमारी, सुरेश कुमारी और रीता देवी भी शामिल हैं। इन सभी का सीधा आरोप है कि नगर पंचायत के गठन में संतुलन बिल्कुल नहीं रखा गया। सरकार ने कई अहम क्षेत्रों को जानबूझकर बाहर कर दिया है।
इन गांवों को छोड़ा बाहर, बणी पंचायत को किया शामिल
याचिकाकर्ताओं ने कुछ विशेष क्षेत्रों की अनदेखी पर कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि जब्बल खैरियां, बरोली, विरसवीं, घुमारवीं, बढऩी, हारमां और जलग्रां जैसे क्षेत्रों को बाहर रखा गया है। भकरेड़ी, मकतेहड़ी और रैल को भी शामिल नहीं किया गया है। दूसरी तरफ कृषि प्रधान बणी पंचायत को पूरी तरह नगर पंचायत का हिस्सा बना दिया गया। ग्रामीण इसे पूरी तरह से अन्यायपूर्ण मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार ने सभी से समान व्यवहार नहीं किया।
सरकार पर पक्षपात का आरोप, ग्रामीणों में भारी गुस्सा
विरोधी पक्ष ने राज्य सरकार के इस फैसले पर सीधा पक्षपात करने का आरोप मढ़ा है। उन्होंने इस पूरे मामले की फिर से समीक्षा करने की जोरदार मांग उठाई है। उनका साफ मानना है कि नगर पंचायत के गठन में सभी क्षेत्रों को एक समान नहीं देखा गया है। सरकार के इस एकतरफा रवैये से स्थानीय लोगों में बहुत ज्यादा असंतोष बढ़ गया है। ग्रामीण इस फैसले के खिलाफ लामबंद होकर अब न्याय की बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं।
एसडीएम ने दी अहम जानकारी, सुप्रीम कोर्ट पर टिकी नजरें
इस पूरे विवाद पर बड़सर की एसडीएम स्वाति डोगरा ने अपनी अहम प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट द्वारा अपील खारिज होने की जानकारी उन्हें सिर्फ न्यायालय की वेबसाइट से मिली है। प्रशासन को अभी तक इसकी कोई आधिकारिक अधिसूचना प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, तो अब अंतिम निर्णय वहीं से आएगा। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं।


