JOA (IT) पेपर लीक: उमा आजाद के निलंबन पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, चयन आयोग को डेडलाइन के साथ दिए ये आदेश

Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चर्चित जेओए (आईटी) पेपर लीक मामले की मुख्य आरोपी उमा आजाद के निलंबन को लेकर सख्त आदेश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत ने राज्य चयन आयोग को निर्देश दिया है कि उमा आजाद के खिलाफ चल रही विभागीय जांच को 31 अगस्त 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाए। अदालत ने उमा आजाद द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह समय सीमा निर्धारित की है।

समय पर जांच पूरी न होने पर उमा आजाद को मिलेगी बड़ी छूट

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि विभागीय जांच को लटकाया नहीं जा सकता। यदि निर्धारित समय सीमा यानी 31 अगस्त 2026 तक जांच पूरी नहीं होती, तो उमा आजाद को अपने निलंबन के खिलाफ दोबारा हाईकोर्ट में गुहार लगाने का पूरा अधिकार होगा। हालांकि, अदालत ने राज्य चयन आयोग को भी थोड़ी राहत दी है। यदि किसी अपरिहार्य कारण से जांच में देरी होती है, तो आयोग अदालत से अतिरिक्त समय की मांग कर सकेगा।

उमा आजाद ने निलंबन को बताया था ‘मनमाना और अवैध’

निलंबित कर्मचारी उमा आजाद ने अपनी याचिका में सरकार के फैसले को कड़ी चुनौती दी थी। उन्होंने अदालत से मांग की थी कि उनके निलंबन आदेश को रद्द कर सभी परिणामी लाभ बहाल किए जाएं। उमा आजाद का तर्क था कि जांच के नाम पर किसी भी कर्मचारी को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित रखना कानूनन गलत और भेदभावपूर्ण है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को मनमाना बताते हुए इंसाफ की गुहार लगाई थी।

क्या है पूरा JOA (IT) पेपर लीक मामला?

जेओए (आईटी) पेपर लीक मामला हिमाचल प्रदेश के इतिहास के सबसे बड़े भर्ती घोटालों में से एक माना जाता है। इस मामले के उजागर होने के बाद हमीरपुर स्थित कर्मचारी चयन आयोग को भंग करना पड़ा था। विजिलेंस की जांच में उमा आजाद की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी और निलंबन हुआ था। इस मामले ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में भारी उथल-पुथल मचा दी थी।

अदालत के आदेश से चयन आयोग पर बढ़ा दबाव

हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब राज्य चयन आयोग को अपनी कार्रवाई तेज करनी होगी। अदालत ने साफ कर दिया है कि विभागीय जांच का जल्द निष्पादन जरूरी है ताकि अनिश्चितता की स्थिति खत्म हो सके। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने यह संतुलित फैसला सुनाया है। अब सबकी नजरें चयन आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या वह तय वक्त के भीतर जांच के निष्कर्ष तक पहुंच पाएगा।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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