Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी में अदालत ने एक अहम फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सदर क्षेत्र के एक व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस व्यक्ति पर चालीस वर्षीय मानसिक रूप से अक्षम महिला के साथ दरिंदगी का आरोप है। पुलिस अदालत में पहले ही अपना आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। पुलिस की चार्जशीट के बाद आरोपी ने जेल से रिहाई की गुहार लगाई थी। लेकिन न्यायालय ने अपराध को गंभीर मानते हुए इनकार कर दिया।
तेरह जनवरी को हुई थी यह खौफनाक घटना
अभियोजन पक्ष ने अदालत में घटना की जानकारी दी। यह दर्दनाक घटना तेरह जनवरी को घटी थी। आरोपी ने सुनसान जगह पर इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया था। महिला मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण अपना बचाव नहीं कर सकी। आरोपी ने महिला की बेबसी का पूरा फायदा उठाया। वह डराकर जबरदस्ती कर रहा था। पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़कर अदालत में मजबूत रिपोर्ट पेश की है।
स्थानीय व्यक्ति के शोर मचाने पर भागा आरोपी
घटना के समय एक स्थानीय व्यक्ति वहां से गुजर रहा था। उसने आरोपी को खौफनाक कृत्य करते हुए देख लिया। उस व्यक्ति ने तुरंत जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया। पकड़े जाने के डर से आरोपी तुरंत मौके से भाग गया। आरोपी ने भागकर खुद को छिपाने की कोशिश की। अगर वह व्यक्ति समय पर नहीं पहुंचता, तो स्थिति भयानक हो सकती थी। चश्मदीद गवाह की भूमिका इस मामले में बेहद अहम है।
बदहवास और रोती हुई हालत में मिली पीड़िता
शोर सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर जमा हो गए। लोगों ने देखा कि पीड़िता बदहवास हालत में थी। वह बुरी तरह रो रही थी और सदमे में थी। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस टीम बिना समय गंवाए घटनास्थल पर पहुंच गई। पुलिस ने महिला को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने केस दर्ज करके सख्त कार्रवाई शुरू कर दी।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर भेजा जेल
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस ने आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे तुरंत न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। पुलिस ने महिला का मेडिकल भी करवाया। घटनास्थल से जरूरी सबूत इकट्ठा किए गए। पुलिस ने जांच पूरी करके अदालत में आरोप पत्र दायर कर दिया। इसी चार्जशीट के आधार पर अदालत में सुनवाई शुरू हुई।
बचाव पक्ष के वकील ने दी झूठे केस की दलील
अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। आरोपी के वकील ने दावा किया कि उसके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है। वकील ने कहा कि आरोपी लंबे समय से जेल में बंद है। बचाव पक्ष ने अदालत में फॉरेंसिक रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने दलील दी कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में सीमेन नहीं पाया गया है। इसी आधार पर वकील ने अदालत से आरोपी को तुरंत जमानत देने की पुरजोर मांग की।
अभियोजन पक्ष ने किया जमानत का कड़ा विरोध
राज्य सरकार की तरफ से पेश वकील ने जमानत का कड़ा विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने कहा कि यह समाज के खिलाफ एक जघन्य अपराध है। अगर आरोपी को जमानत मिलती है, तो वह बाहर आकर गवाहों को डरा सकता है। वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी समाज के लिए एक बड़ा खतरा है। इसलिए उसे किसी भी कीमत पर जेल से बाहर आने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए।
अदालत ने फॉरेंसिक रिपोर्ट की कमी को किया नजरअंदाज
दोनों पक्षों की पूरी बहस सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया। न्यायाधीश ने माना कि वैज्ञानिक साक्ष्यों में कुछ तकनीकी कमी हो सकती है। लेकिन इस मामले में चश्मदीद गवाह का बयान सबसे ज्यादा अहम है। इसके अलावा स्वयं पीड़िता का बयान भी महत्वपूर्ण सबूत माना गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर इतने बड़े अपराध को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्याय के लिए सभी साक्ष्यों को देखना जरूरी है।
मानसिक रूप से अक्षम महिला से अपराध है बेहद घातक
न्यायालय ने अपने फैसले में समाज को एक सख्त संदेश दिया है। जज ने कहा कि मानसिक रूप से दिव्यांग महिला के साथ किया गया कृत्य घातक है। असहाय लोगों के साथ अपराध करने वालों को सहानुभूति नहीं मिलनी चाहिए। कानून में इस तरह के जघन्य मामलों के लिए बहुत कठोर सजा का प्रावधान है। अदालत ने आरोपी की सभी दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने उसकी जमानत याचिका को पूरी तरह नामंजूर कर दिया।

