Himachal News: मंडी की जिला एवं सत्र न्यायालय ने चरस तस्करी के गंभीर मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी मनोज कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी एक पेशेवर अपराधी है। ऐसे व्यक्ति को रिहा करना समाज और युवा पीढ़ी के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मजबूत साक्ष्य पेश किए थे। वित्तीय लेन-देन और कॉल रिकॉर्ड ने उसकी संलिप्तता पूरी तरह साबित कर दी है।
बल्ह पुलिस की छापेमारी और चरस की बरामदगी
यह मामला 10 जनवरी 2026 को सामने आया था। पुलिस थाना बल्ह की टीम ने दरव्यास गांव में जोगिंद्र सिंह के घर छापा मारा था। इस दौरान पुलिस को 422 ग्राम चरस बरामद हुई थी। पुलिस ने मौके पर जोगिंद्र की पत्नी कृष्णा देवी को गिरफ्तार किया था। कृष्णा देवी ने पूछताछ में बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि सरकाघाट के मनोज कुमार ने उन्हें यह चरस बेची थी। इसके लिए 25,000 रुपए का भुगतान किया गया था।
डिजिटल सबूतों ने खोली आरोपी की पोल
पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की। जांच टीम ने आरोपियों के बैंक ट्रांजैक्शन खंगाले। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की भी बारीकी से जांच की गई। इन दस्तावेजों ने मनोज और मुख्य आरोपियों के बीच वित्तीय संबंधों की पुष्टि कर दी। ठोस सबूत मिलने के बाद पुलिस ने 18 मार्च 2026 को मनोज कुमार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के वकील ने उसे निर्दोष बताया। उन्होंने दलील दी कि मनोज को सिर्फ सह-आरोपी के बयान पर फंसाया गया है।
पुराना आपराधिक रिकॉर्ड बना जमानत में बाधा
लोक अभियोजक ने जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मनोज कुमार के खिलाफ पहले भी दो केस दर्ज हैं। वर्ष 2018 और 2023 में सरकाघाट थाने में उसके विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले दर्ज हुए थे। अभियोजन पक्ष ने उसे एक शातिर नशा तस्कर करार दिया। कोर्ट ने दलीलों को सुनने के बाद माना कि आरोपी पेशेवर तरीके से तस्करी में लिप्त है। इन आधारों पर कोर्ट ने जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया।

