हिमाचल प्रदेश में मीट दुकान पर तीन लोगों ने की मारपीट और जातिसूचक गालियां भी दी, SC/ST एक्ट में केस दर्ज करने की उठी मांग

Himachal Pradesh News: मंडी जिले के गोहर थाना क्षेत्र के चैल चौक में एक मीट दुकान पर हुई मारपीट और धमकी के मामले में अब जाति आधारित अपमान की शिकायत सामने आई है। पीड़ित पक्ष ने सप्लीमेंट्री एप्लीकेशन देकर SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ने की मांग की है। आरोपी तीन व्यक्ति सामान्य वर्ग से बताए जा रहे हैं जबकि पीड़ित परिवार अनुसूचित जाति से जुड़ा है।

पुलिस ने मूल FIR में BNS की धाराएं 126(2), 115(2), 351(2), 324(4) और 3(5) दर्ज की थीं। इनमें गलत तरीके से रोकना, चोट पहुंचाना, आपराधिक धमकी और संपत्ति को नुकसान शामिल है। घटना 3 अप्रैल 2026 को शाम करीब 7 बजे चैलचौक इलाके की दुकान पर हुई। तीन आरोपी दुकान में घुसे और मारपीट शुरू कर दी।

घटना का विवरण

शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपी परमजीत सिंह उर्फ पंकज, पवन कुमार और ठाकुर दास सकोर दुकान में पहुंचे। उन्होंने बदमाशी की बात कहते हुए हाथापाई शुरू की। पीड़ित बाहर भागा तो आरोपी ने पीछे से खींचा और रास्ता रोका। फिर मुक्कों से मारपीट की। एक आरोपी ने गले पर टोका रखकर जान से मारने की धमकी दी।

दुकान का शीशा टूट गया। करीब 15 किलो मांस और 20 किलो आलू खराब हो गया। एक दलित महिला बचाने आई तो उसे भी धक्का दिया गया। पुलिस ने इन आरोपों पर तुरंत कार्रवाई की और FIR दर्ज की।

जातिसूचक गालियों का आरोप

अब पीड़िता मस्तु देवी ने सप्लीमेंट्री शिकायत दी है। वे गांव बैहना, तहसील बल्ह, जिला मंडी की निवासी हैं और अनुसूचित जाति से संबंध रखती हैं। उनके अनुसार आरोपी ने उन्हें और परिवार को जातिसूचक शब्दों से गाली दी।

यह अपमान जानबूझकर जाति के आधार पर किया गया। मौके पर कई गवाह भी मौजूद थे जिन्होंने पूरे घटनाक्रम को देखा और सुना है। उन्होंने SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) जोड़ने की मांग की है।

SC/ST एक्ट की प्रासंगिकता

SC/ST एक्ट में धारा 3(1)(r) जानबूझकर अपमान या धमकी को कवर करती है जब इरादा SC/ST सदस्य को अपमानित करना हो। धारा 3(1)(s) जाति नाम लेकर गाली देने पर लागू होती है। दोनों धाराएं सार्वजनिक दृष्टि में घटना होने पर मजबूत होती हैं।

हिमाचल प्रदेश में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ रही है। NCRB आंकड़ों के अनुसार राज्य में SC/ST एक्ट के तहत दर्ज FIR कुल FIR का करीब 13 प्रतिशत हिस्सा बनती हैं। पुलिस जांच DSP स्तर के अधिकारी से कराने की भी मांग की गई है।

पुलिस की भूमिका और आगे की कार्रवाई

गोहर थाना प्रभारी को दिए गए आवेदन में मूल FIR को सप्लीमेंट किया गया है। पीड़ित पक्ष ने गवाहों के बयान दर्ज करने और अतिरिक्त सबूतों की जांच की मांग की है। अगर पुलिस धाराएं नहीं जोड़ती तो उच्च अधिकारी या अदालत का रुख किया जा सकता है।

ऐसे मामलों में सबूत जैसे गवाह बयान, मेडिकल रिपोर्ट और CCTV फुटेज महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हिमाचल प्रदेश पुलिस ने हाल के वर्षों में SC/ST मामलों में सख्ती दिखाई है। जांच में इरादे और सार्वजनिक स्थान का पहलू जांचा जाएगा।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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