जिंदगी बचाने वाली दवाओं के नाम पर बिक रहा था जहर! 50 करोड़ के फर्जीवाड़े में 6 गिरफ्तार, ऐसे खुली मौत की फैक्ट्री

Delhi News: क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने एक बड़े अंतरराज्यीय रैकेट का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह नकली जीवन रक्षक दवाएं बेचने का काला कारोबार कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में छह शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से एक लाख बीस हजार नकली गोलियां बरामद हुई हैं। इन दवाओं की बाजार कीमत दो करोड़ रुपये है। पुलिस ने पचास करोड़ के फर्जी जीएसटी बिलिंग नेटवर्क का भी खुलासा किया है।

डायबिटीज और बीपी की नकली दवाएं बरामद

जब्त की गई दवाएं बहुत ही गंभीर बीमारियों के इलाज में काम आती हैं। इनमें मुख्य रूप से डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की दवाइयां शामिल हैं। इसके अलावा संक्रमण रोकने वाली नकली दवाएं भी भारी मात्रा में मिली हैं। आरोपी नामी कंपनियों के नाम पर इन दवाओं की पैकिंग करते थे। ड्रग कंट्रोल विभाग ने इन सभी दवाओं की जांच की है। फार्मा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी साफ किया है कि ये दवाएं पूरी तरह से नकली हैं।

मुजफ्फरनगर में चल रही थी अवैध फैक्ट्री

पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों से बहुत कड़ाई से पूछताछ की है। इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ। यह दवा फैक्ट्री करीब एक हजार वर्ग गज के विशाल इलाके में फैली हुई थी। इसी जगह पर आरोपी बड़े पैमाने पर नकली गोलियां बना रहे थे। पुलिस टीम को यहां से भारी मात्रा में कच्चा माल और आधुनिक मशीनें मिली हैं। आरोपियों के पास से नकली पैकेजिंग का सामान भी बरामद किया गया है।

फर्जी जीएसटी बिलिंग से चलता था खेल

इस पूरे काले कारोबार को चलाने के लिए फर्जी जीएसटी फर्मों का सहारा लिया जाता था। पुलिस ने शाहरुख और राहुल नाम के दो आरोपियों को पकड़ा है। ये दोनों आरोपी फर्जी कंपनियां बनाकर नकली बिल तैयार करते थे। इससे वे अपने गैर-कानूनी काम को पूरी तरह से वैध दिखाते थे। पुलिस ने इनके मोबाइल फोन की गहनता से जांच की है। जांच में पचास करोड़ रुपये के फर्जी इनवॉइस और कई फर्जी कंपनियों का बड़ा पर्दाफाश हुआ है।

टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर होता था संपर्क

पुलिस की इस अहम जांच में कई चौंकाने वाले बड़े खुलासे हुए हैं। आरोपी आपस में बातचीत करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते थे। यह पूरा नेटवर्क मुख्य रूप से टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए चलाया जा रहा था। पुलिस की टीम ने ग्यारह मार्च को भागीरथ पैलेस में छापा मारा था। वहां से बाबा श्याम मेडिकोज के मालिक निखिल अरोड़ा को पकड़ा गया था। वह इन नकली दवाओं का बहुत बड़ा थोक कारोबारी बताया जाता है।

दिल्ली और यूपी से पकड़े गए छह आरोपी

पुलिस ने इस बड़े गिरोह के कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें दिल्ली के शाहदरा का रहने वाला निखिल अरोड़ा शामिल है। गाजियाबाद का शिवम त्यागी और मोदीनगर का मयंक अग्रवाल भी पकड़ा गया है। पुलिस ने रुड़की के मुख्य सप्लायर मोहित कुमार शर्मा को भी दबोचा है। इसके अलावा मुरादनगर का शाहरुख और दिल्ली का राहुल भी पुलिस की गिरफ्त में है। इस पूरे गिरोह का एक मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।

दवा बेचने का कोई वैध लाइसेंस नहीं मिला

पुलिस और ड्रग विभाग की टीम लगातार मामले की जांच कर रही है। आरोपियों के पास से दवा बेचने या स्टॉक करने का कोई वैध लाइसेंस नहीं मिला है। यह एक बहुत ही संगठित अंतरराज्यीय गिरोह है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की सरगर्मी से तलाश कर रही है। फरार मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए कई जगह दबिश दी जा रही है। पुलिस आगे की पूरी सप्लाई चेन का बारीकी से पता लगा रही है।

अस्पतालों और मरीजों के लिए बना बड़ा खतरा

नकली दवाओं का यह काला कारोबार आम जनता के लिए बहुत बड़ा खतरा है। इन नकली गोलियों का सेवन करने से बेगुनाह मरीजों की जान भी जा सकती थी। पुलिस ने समय रहते इस गिरोह को पकड़कर हजारों लोगों की जान बचाई है। क्राइम ब्रांच की टीम अब बाजार में सप्लाई की गई दवाओं को वापस मंगा रही है। दवा विक्रेताओं से भी अपील की गई है कि वे केवल अधिकृत डीलरों से ही दवा खरीदें। पुलिस की कानूनी कार्रवाई जारी है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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