Himachal News: पंजाब के जालंधर से 12 साल पहले चोरी हुई एक स्कूटी हिमाचल प्रदेश के गगरेट में पकड़ी गई है। इस घटना ने पुलिस की पूरी निगरानी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। इतने सालों तक यह स्कूटी हर टोल, नाके और सीसीटीवी कैमरे को आसानी से चकमा देती रही। गगरेट पुलिस ने पंजाब-हिमाचल सीमा पर एक नाके के दौरान इसे बरामद किया। स्कूटी पर जाली नंबर लगा था। चेसिस नंबर की मदद से इसके असली मालिक का पता चला। अब कोर्ट के आदेश के बाद स्कूटी असली मालिक को सौंप दी गई है।
पुलिस नाके पर घबराकर भागे दोनों युवक
गगरेट पुलिस ने आशादेवी क्षेत्र में नियमित नाका लगाया था। इसी दौरान एक स्कूटी पर सवार दो युवक वहां पहुंचे। पुलिस को देखते ही वे बुरी तरह घबरा गए। वे स्कूटी को वहीं छोड़कर मौके से तुरंत फरार हो गए। पुलिस को उनका यह बर्ताव बहुत अजीब और संदिग्ध लगा। इसके बाद पुलिस ने तुरंत स्कूटी को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस ने मामले की बारीकी से जांच शुरू कर दी।
चेसिस नंबर से सामने आया 12 साल पुराना सच
पुलिस ने सबसे पहले स्कूटी का नंबर चेक किया। जांच में स्कूटी पर लगा नंबर पूरी तरह फर्जी निकला। इसके बाद पुलिस ने चेसिस नंबर का सहारा लिया। रिकॉर्ड खंगालने पर पुलिस के भी होश उड़ गए। यह स्कूटी करीब 12 साल पहले पंजाब के जालंधर से चोरी हुई थी। यह पीबी 08सीवी 9099 नंबर की एक्टिवा है। यह स्कूटी जालंधर के रहने वाले कृष्ण लाल के नाम पर दर्ज है।
शिकायत के बावजूद नहीं लिखी गई थी एफआईआर
इस मामले ने जालंधर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जब 12 साल पहले यह स्कूटी चोरी हुई थी, तब मालिक ने थाने में शिकायत दी थी। लेकिन जालंधर पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस ने तब एक एफआईआर तक दर्ज नहीं की थी। स्कूटी मिलने की खबर सुनकर खुद असली मालिक भी हैरान रह गया।
सिस्टम और सुरक्षा दावों पर उठे गंभीर सवाल
यह मामला पूरे सुरक्षा तंत्र पर एक करारा तमाचा है। 12 साल तक यह चोरी का वाहन सिस्टम की पकड़ से बाहर कैसे रहा? इतने लंबे समय में यह स्कूटी कई टोल नाकों और सीमाओं से गुजरी होगी। हर जगह सीसीटीवी कैमरे और स्मार्ट सर्विलांस के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। फिर भी कोई कैमरा या पुलिस नाका इस स्कूटी को क्यों नहीं पकड़ पाया? अपराधी 12 साल तक पुलिस और कानून की आंखों में आराम से धूल झोंकते रहे।
कोर्ट के आदेश पर मालिक को मिली स्कूटी
गगरेट पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया। स्कूटी को सुपुर्दगी प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखा गया था। इसके बाद असली मालिक ने वाहन रिहा करने के लिए अदालत में याचिका लगाई। अदालत से आदेश मिलने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने स्कूटी असली मालिक को सौंप दी। मालिक अपनी स्कूटी पाकर बहुत खुश है। लेकिन इसे 12 साल तक चलाने वाले आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

