Chhattisgarh News: राजधानी रायपुर से न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक बड़ी खबर आई है। मौदहापारा थाना क्षेत्र में 39 लाख रुपये की ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। अदालत ने इस मामले के मुख्य आरोपी मोहम्मद इमरान नवाब को एक तगड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने धोखाधड़ी के इस मास्टरमाइंड की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस की लंबी सुस्ती के बाद अदालत का यह कड़क फैसला पीड़ित के लिए एक बड़ी उम्मीद लेकर आया है।
कोर्ट ने क्यों खारिज की अग्रिम जमानत याचिका?
आरोपी मोहम्मद इमरान नवाब ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पूरी चालाकी दिखाई। उसने अपने वकील के जरिए अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने इस मामले की बहुत बारीकी से सुनवाई की। अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखा और ठगी के तथ्यों को परखा। कोर्ट ने साफ माना कि मामला बेहद गंभीर है और इसमें आरोपी की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध है। इसलिए उसे किसी भी तरह की राहत देना कानून के खिलाफ होगा। अदालत ने बिना देरी किए इस जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में मौदहापारा पुलिस की कार्यशैली सीधे तौर पर संदेह के घेरे में है। पीड़ित मोहम्मद शाहनवाज ने आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूतों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में पूरे 135 दिनों की भारी देरी कर दी। इस देरी का सीधा फायदा आरोपी इमरान नवाब को मिला। उसे सबूत मिटाने और आसानी से फरार होने का पूरा वक्त मिल गया। काफी दबाव बढ़ने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 420, 406 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया।
गिरफ्तारी का रास्ता साफ, पुलिस की होगी असली परीक्षा
अदालत से जमानत खारिज होने के बाद अब आरोपी की गिरफ्तारी का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। पीड़ित शाहनवाज को अब न्याय प्रणाली से ही पूरी उम्मीद बंधी है। उन्हें भरोसा है कि उनका लूटा हुआ पैसा वापस मिल जाएगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपी की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। लेकिन असली सवाल यह है कि पुलिस इतने दिन तक खामोश क्यों बैठी रही। आरोपी की जल्द गिरफ्तारी ही अब पुलिस की गिरती छवि को बचा सकती है।

