Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में आज एक बड़ी हलचल हुई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की विशेष अदालत में 59 आरोपियों को पेश किया गया। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस 3200 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में कई बड़े नेताओं और अधिकारियों के नाम शामिल हैं। अब अदालत के फैसले पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं।
भूपेश सरकार के समय रची गई 3200 करोड़ की साजिश
ईडी और एसीबी की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह घोटाला 3200 करोड़ रुपये से भी बड़ा है। तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था। इस सिंडिकेट ने सुनियोजित तरीके से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया। मामले में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के पूर्व एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर मुख्य रूप से शामिल हैं।
कमीशन का खेल और नकली होलोग्राम से हुई बंपर कमाई
इस घोटाले को तीन मुख्य तरीकों से अंजाम दिया गया। साल 2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 से 100 रुपये तक मोटा कमीशन वसूला गया। इसके अलावा नकली होलोग्राम का एक बड़ा खेल भी खेला गया। अवैध तरीके से अतिरिक्त शराब बनाई गई। फिर इस शराब पर नकली होलोग्राम लगाकर इसे सरकारी दुकानों से बेचा गया। विधु गुप्ता नामक व्यक्ति ने ये नकली होलोग्राम सप्लाई किए थे। अरविंद सिंह और उसके भतीजे अमित सिंह ने खाली बोतलों का इंतजाम किया। दुकानदारों को इस अवैध बिक्री का रिकॉर्ड सरकारी फाइलों में दर्ज न करने का सख्त आदेश था।
सप्लाई जोन में हेरफेर कर की गई भारी अवैध वसूली
घोटालेबाजों ने शराब दुकानों के सप्लाई जोन में भी बड़ा हेरफेर किया। कमीशन तय करने के लिए दुकानों को आठ अलग-अलग जोन में बांटा गया। एपी त्रिपाठी ने इन जोन का पूरा विश्लेषण तैयार किया ताकि अवैध वसूली आसानी से हो सके। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच में बड़े सुबूत हाथ लगे हैं। पता चला है कि सिर्फ तीन वित्तीय वर्षों में सिंडिकेट को 52 करोड़ रुपये दिए गए। यह घोटाला सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं है। अब कोर्ट के फैसले से ही तय होगा कि इन सफेदपोश आरोपियों को क्या सजा मिलती है।


