हिमाचल के स्कूलों में शुरू हुईं नर्सरी कक्षाएं, लेकिन पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं! 6000 नौकरियों पर फंसा पेंच

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के 6,409 प्राथमिक स्कूलों में आधिकारिक तौर पर ‘नर्सरी’ कक्षाएं शुरू हो गई हैं। लेकिन, इस बड़ी और महत्वाकांक्षी योजना के सामने योग्य शिक्षकों का भारी अकाल एक बड़ी चुनौती बन गया है। सरकार बच्चों की नींव मजबूत करना चाहती है। इसके लिए हजारों भर्तियां निकाली गई हैं। लेकिन सख्त नियमों के कारण स्कूलों को योग्य शिक्षक ही नहीं मिल रहे हैं।

हजारों पदों पर शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया

विधानसभा के प्रश्नकाल में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने राज्य की शिक्षा नीति का पूरा खाका पेश किया। सरकार का मुख्य लक्ष्य 6,409 नर्सरी शिक्षकों (NTT) की भर्ती करना है। वर्तमान में 6,297 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इन भर्तियों की जिम्मेदारी ‘हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम’ को दी गई है। बच्चों की देखभाल के लिए ‘आया’ की नियुक्ति भी हो रही है। हमीरपुर, मंडी, ऊना और सिरमौर जिलों में अब तक 334 नियुक्तियां पूरी कर ली गई हैं।

शिक्षक बनने की राह में रोड़ा बने सख्त नियम

नर्सरी शिक्षक बनने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। इन्ही नियमों की वजह से ज्यादातर युवा इस भर्ती से बाहर हो रहे हैं। शिक्षा विभाग ने कुछ जरूरी शर्तें तय की हैं:

  • उम्मीदवार के पास 12वीं कक्षा में कम से कम 50% अंक होना अनिवार्य है।
  • उम्मीदवार के पास दो साल का डिप्लोमा (D.E.C.Ed.) होना चाहिए।
  • या फिर उम्मीदवार के पास बी.एड (नर्सरी) की वैध डिग्री होनी चाहिए।

इन सख्त शर्तों के कारण बहुत ही कम लोग अपनी पात्रता साबित कर पा रहे हैं। इससे हजारों पद खाली रहने का खतरा मंडरा रहा है।

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मिलेंगे शिक्षा मंत्री

कड़े नियमों के चलते राज्य में हजारों पदों के खाली रहने का डर पैदा हो गया है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि राज्य सरकार खुद इन नियमों में कोई बदलाव नहीं कर सकती। इसलिए अब हिमाचल के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर जल्द ही दिल्ली का रुख करेंगे। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से खास मुलाकात करेंगे। राज्य सरकार की मांग है कि या तो भर्ती के इन कड़े नियमों में कुछ ढील दी जाए। या फिर शिक्षकों की विशेष ट्रेनिंग के लिए केंद्र सरकार राज्य की मदद करे।

SOURCE: न्यूज़ एजेंसियां
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