Himachal News: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक मानकों पर ले जाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने मंडी, कुल्लू, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों के सात प्रमुख वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध करने की मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने इस फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। अब इन दूरदराज के इलाकों के छात्र भी वही पाठ्यक्रम पढ़ेंगे, जो देश के नामी निजी स्कूलों में पढ़ाया जाता है।
राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होंगे छात्र
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की जगह अब इन सात स्कूलों में सीबीएसई का सिलेबस लागू होगा। इस बदलाव का सीधा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो भविष्य में नीट (NEET) या जेईई (JEE) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीएसई पाठ्यक्रम राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के अनुकूल होता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी छात्रों को समान अवसर मिलेंगे और वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ेंगे नहीं।
इन सात स्कूलों की बदली किस्मत
सरकार ने पहले चरण में उन स्कूलों का चयन किया है, जहां बुनियादी ढांचा और छात्रों की संख्या बेहतर है। इन स्कूलों की सूची इस प्रकार है:
- मंडी जिला: बलदवाड़ा, कोलनी धलवान और भदेरवार स्कूल।
- हमीरपुर जिला: रैली जजरी और लोहारली स्कूल।
- कुल्लू जिला: भुंतर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय।
- कांगड़ा जिला: हरिपुर गुलेर स्कूल।
शिक्षकों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग
शिक्षा विभाग केवल बोर्ड नहीं बदल रहा, बल्कि पढ़ाने का तरीका भी बदलने की तैयारी में है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि चयनित स्कूलों के शिक्षकों को सीबीएसई के मानकों के अनुसार विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। नई शिक्षण पद्धति और आधुनिक परीक्षा प्रणाली को समझने के लिए संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि जब शिक्षक नई प्रणाली में पारंगत होंगे, तभी वे छात्रों का सही मार्गदर्शन कर पाएंगे।
शिक्षा के ढांचे में सुधार की बड़ी पहल
इस निर्णय को प्रदेश के शिक्षा ढांचे में एक क्रांतिकारी सुधार के रूप में देखा जा रहा है। अब तक सीबीएसई की शिक्षा केवल महंगे निजी स्कूलों या केंद्रीय विद्यालयों तक सीमित मानी जाती थी। राज्य सरकार का यह कदम इस धारणा को तोड़ रहा है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में राज्य के और भी कई सरकारी स्कूलों को इस योजना के दायरे में लाया जाएगा, ताकि हिमाचल का हर बच्चा अंतरराष्ट्रीय मानकों वाली शिक्षा प्राप्त कर सके।

