Himachal News: हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में स्थित आईआईटी मंडी ने अंतरिक्ष विज्ञान में बड़ा मुकाम हासिल किया है। यहां के प्रतिभाशाली इंजीनियरों ने चार साल की कड़ी मेहनत के बाद ‘मौर्या’ नाम का एक शानदार मार्स रोवर प्रोटोटाइप तैयार किया है। यह विशेष रोवर मंगल ग्रह जैसी बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने के लिए बनाया गया है। यह बेहतरीन प्रोटोटाइप भारत की तेजी से बढ़ती तकनीकी क्षमता का एक शानदार उदाहरण पेश करता है।
आधुनिक तकनीक और खासियतों से लैस है ‘मौर्या’
आईआईटी मंडी का यह दूसरा और ज्यादा उन्नत रोवर मॉडल है। इसे पिछले प्रोजेक्ट के अनुभवों के आधार पर काफी बेहतर बनाया गया है। इस नए मॉडल में कई बेहतरीन और आधुनिक फीचर्स जोड़े गए हैं। इसमें ‘डिफरेंशियल ड्राइव’ और विशेष ‘रॉकर जॉइंट’ डिजाइन का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है। इन तकनीकों की मदद से यह भारी रोवर मंगल ग्रह जैसी ऊबड़-खाबड़ और पथरीली सतहों पर भी बहुत आसानी से अपना रास्ता तय कर सकता है।
मिट्टी और पर्यावरण की सटीक जांच करेगा रोवर
इस रोवर के हर पहिये को नियंत्रित करने के लिए अलग यूनिट लगाई गई है। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसमें एक मुख्य मास्टर स्विच भी दिया गया है। रोवर में ‘लाइफ साइंस मॉड्यूल’ नामक तकनीक का उपयोग हुआ है। यह मॉड्यूल मंगल की मिट्टी और पर्यावरण का सटीक विश्लेषण करने में पूरी तरह सक्षम है। इसके अलावा रोवर टीम अब यूरोपियन रोवर चैलेंज जैसी कई बड़ी वैश्विक प्रतियोगिताओं में भाग लेने की जोरदार तैयारी कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का दबदबा बढ़ाने की तैयारी
वैश्विक प्रतियोगिताओं में दुनिया भर के रोबोट्स को मंगल जैसे कृत्रिम वातावरण में कड़ी चुनौती दी जाती है। हाल ही में ‘मौर्या’ ने यूनिवर्सिटी रोवर चैलेंज में हिस्सा लिया था। वहां इसका प्रदर्शन काफी ज्यादा शानदार रहा। रोबोटिक्स सेंटर के सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपक रैना ने इस प्रोजेक्ट पर अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि टीम अब इस रोवर मॉडल को और भी हल्का और मजबूत बनाने पर लगातार अपना काम कर रही है।

