Himachal News: हिमाचल प्रदेश के 151 सरकारी स्कूलों में सुक्खू सरकार ने सीबीएसई पैटर्न लागू किया है। इस बड़े फैसले के बाद स्कूलों में दाखिले के लिए छात्रों की भारी भीड़ उमड़ रही है। शिक्षा विभाग के अनुसार कई स्कूलों में एडमिशन करीब दोगुना हो गए हैं। अब इन स्कूलों में मेडिकल, नॉन-मेडिकल और कॉमर्स संकाय की पढ़ाई शुरू होगी। वहीं दूसरी तरफ काउंसलिंग प्रक्रिया में हो रही भारी देरी के कारण प्रदेश के दस हजार से अधिक शिक्षकों में भारी रोष पनप रहा है।
सीबीएसई पैटर्न से स्कूलों में तेजी से बढ़ा नामांकन
प्रदेश के स्कूलों में सीबीएसई पैटर्न शुरू होने से नामांकन में भारी उछाल आया है। चंबा जिले के किलाड़ स्कूल में छात्रों की संख्या 90.24 प्रतिशत तक बढ़ गई है। मंडी के जंजैहली में 90.43 फीसदी की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज हुई। किन्नौर के रिकांगपिओ में 50.50 प्रतिशत और शिमला के नेरवा में 52.22 फीसदी एडमिशन बढ़े हैं। इसके अलावा काजा, ठियोग और नौहराधार जैसे ग्रामीण इलाकों में भी छात्रों की संख्या में काफी अच्छी वृद्धि देखी जा रही है।
शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश ने लगाई लंबी छलांग
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिक्षा क्षेत्र में हुए सुधारों पर खुशी जताई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के कड़े प्रयासों से हिमाचल शिक्षा में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। साल 2021 में प्रदेश गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में देश में 21वें पायदान पर था। सरकार का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी बेहतरीन शिक्षा प्रदान करना है। शिक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए सरकार भविष्य में कई नए और अहम कदम उठा रही है।
काउंसलिंग में देरी होने से 10 हजार शिक्षकों में गुस्सा
एक तरफ स्कूलों में एडमिशन बढ़ रहे हैं, वहीं शिक्षकों में नाराजगी है। 22 मार्च को शिक्षकों के लिए एक अहम स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित किया गया था। इस परीक्षा में करीब 10,000 शिक्षकों ने भाग लिया था। परीक्षा हुए तीन सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है। फिर भी विभाग ने काउंसलिंग का शेड्यूल जारी नहीं किया है। इस वजह से हजारों अभ्यर्थियों के बीच बहुत ज्यादा अनिश्चितता और मानसिक तनाव का माहौल बन गया है।
शिक्षक संघ ने सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
गुस्साए शिक्षकों ने सरकार और शिक्षा बोर्ड से जल्द काउंसलिंग शुरू करने की मांग की है। नरेश शर्मा, सुरेश ठाकुर, विकास और ज्योति चंदेल सहित कई शिक्षकों ने पारदर्शी प्रक्रिया की अपील की है। उनका कहना है कि सरकार को तुरंत समयबद्ध काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। शिक्षकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द शेड्यूल जारी नहीं हुआ, तो वे मजबूर होंगे। अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए सभी शिक्षक आगे एक बड़ी रणनीति तैयार कर रहे हैं।

