Himachal Pradesh News: प्रदेश की कामकाजी महिलाओं के लिए सरकार ने एक बड़ी राहत का एलान किया है। महिला एवं बाल विकास विभाग राज्य भर में 152 नए क्रैच यानी बाल देखभाल केंद्र खोलने की तैयारी पूरी कर चुका है। इन केंद्रों के माध्यम से उन महिलाओं को बड़ी मदद मिलेगी जो नौकरी की वजह से अपने छोटे बच्चों की देखभाल को लेकर चिंतित रहती थीं। सरकार का यह कदम न केवल महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के सैकड़ों नए अवसर भी पैदा करेगा।
भर्ती प्रक्रिया और चयन के लिए बनाई गई विशेष कमेटी
इन नए क्रैच केंद्रों के सफल संचालन के लिए विभाग जल्द ही वर्कर और हेल्पर के पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करेगा। सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इन नियुक्तियों की जिम्मेदारी एसडीएम की अध्यक्षता में गठित एक विशेष कमेटी को सौंपी है। यह कमेटी ही योग्य उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच और चयन का अंतिम फैसला करेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह मेरिट और निर्धारित पात्रता मानदंडों के आधार पर ही संपन्न की जाएगी।
वेतनमान और शैक्षणिक योग्यता के कड़े मानक तय
भर्ती के लिए सरकार ने शैक्षणिक योग्यता और मानदेय के स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। क्रैच वर्कर के पद के लिए उम्मीदवार का कम से कम 12वीं पास होना अनिवार्य है, जबकि हेल्पर के लिए 10वीं पास की योग्यता तय की गई है। मानदेय की बात करें तो वर्कर को हर महीने 6500 रुपये और हेल्पर को 3500 रुपये दिए जाएंगे। विभाग का मानना है कि इन पदों पर स्थानीय महिलाओं की नियुक्ति से बच्चों को बेहतर और सुरक्षित माहौल मिल सकेगा।
पुराने कर्मचारियों के अनुभव को तरजीह और पात्रता की शर्त
नए केंद्रों के साथ-साथ सरकार ने पहले से चल रहे क्रैचों में कार्यरत कर्मचारियों के भविष्य पर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। विभाग के निदेशक डॉ. पंकज ललित के अनुसार, जो कर्मचारी पहले से सेवा में हैं और पात्रता पूरी करते हैं, उन्हें हटाया नहीं जाएगा। उनके अनुभव का लाभ लेने के लिए उन्हें दोबारा काम करने का मौका दिया जाएगा। हालांकि, जो कर्मचारी नए मानकों और पात्रता शर्तों पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें अपनी जगह गंवानी पड़ सकती है और वहां नई भर्ती होगी।
महिला सशक्तिकरण और बेहतर बाल देखभाल की दिशा में कदम
प्रदेश सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। इन केंद्रों में बच्चों के रहने, खेलने और प्रारंभिक शिक्षा के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। जब कामकाजी महिलाओं को यह भरोसा होगा कि उनके बच्चे सुरक्षित हाथों में हैं, तो वे पूरी एकाग्रता के साथ अपने कार्यक्षेत्र में योगदान दे सकेंगी। यह योजना राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी।

