SBI का महा-धमाका: ICICI बैंक को पछाड़ बना देश का दूसरा सबसे बड़ा सूरमा, बैंकिंग सेक्टर में मची भारी हलचल

India News: भारतीय बैंकिंग जगत में मार्च की तिमाही एक बड़े ऐतिहासिक फेरबदल की गवाह बनी है। सरकारी क्षेत्र के दिग्गज स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने बाजार पूंजीकरण (Market Cap) के मामले में निजी क्षेत्र के महारथी ICICI बैंक को पीछे छोड़ दिया है। अब SBI देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि बैंकिंग सेक्टर के लिए पिछला कुछ समय काफी तनावपूर्ण रहा है। मंदी के डर और बिकवाली के बावजूद SBI ने अपनी स्थिति को बेहद मजबूती से बरकरार रखा है।

ICICI बैंक के मार्केट कैप में आई बड़ी सुनामी

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, SBI के मार्केट कैप में महज 0.3% की बहुत मामूली गिरावट देखी गई। इसकी कुल बाजार वैल्यू करीब ₹9 लाख करोड़ के इर्द-गिर्द टिकी रही। इसके उलट ICICI बैंक को निवेशकों की बेरुखी का सामना करना पड़ा। इस निजी बैंक के मार्केट कैप में 10% से भी ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसी बड़े फासले ने रैंकिंग के समीकरण बदल दिए। बाजार के जानकारों का कहना है कि SBI के स्थिर नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) ने उसे इस संकट में सहारा दिया है।

20 में से 18 दिग्गज बैंकों को लगा तगड़ा झटका

मार्च तिमाही के दौरान पूरा बैंकिंग सेक्टर ही संघर्ष करता हुआ नजर आया। रिपोर्ट के अनुसार देश के 20 सबसे बड़े बैंकों में से 18 के मार्केट कैप में गिरावट आई है। वैश्विक बाजारों में छाई अनिश्चितता और मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव ने निवेशकों को डरा दिया। इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भी भारतीय बाजार से भारी मात्रा में पैसा निकाला। इस चौतरफा बिकवाली ने बैंकिंग शेयरों पर दबाव को और ज्यादा बढ़ा दिया।

गिरावट के बावजूद HDFC बैंक का शीर्ष पर कब्जा

देश के सबसे बड़े बैंक की बात करें तो HDFC बैंक अब भी पहले पायदान पर मजबूती से खड़ा है। हालांकि इसके निवेशकों के लिए भी यह तिमाही अच्छी नहीं रही। HDFC बैंक के मार्केट कैप में करीब 26% की भारी-भरकम गिरावट आई है। भारी बिकवाली के पीछे बैंक के मैनेजमेंट से जुड़ी कुछ खबरें और वैश्विक बाजार की कमजोर धारणा को जिम्मेदार माना जा रहा है। इतनी बड़ी गिरावट के बाद भी मार्केट कैप के मामले में कोई भी दूसरा बैंक फिलहाल इसे चुनौती देता नहीं दिख रहा है।

भरोसेमंद रणनीति और फंडामेंटल का कमाल

बैंकिंग सेक्टर के इस उतार-चढ़ाव ने एक बात साफ कर दी है कि मजबूत फंडामेंटल ही मुश्किल वक्त में काम आते हैं। SBI का ICICI बैंक को पछाड़ना यह दर्शाता है कि निवेशक अब सरकारी बैंकों के स्थिर प्रदर्शन पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अगर वैश्विक परिस्थितियां सुधरती हैं, तो बैंकिंग इंडेक्स में फिर से तेजी आ सकती है। फिलहाल SBI अपनी नई पोजिशन के साथ निवेशकों के लिए पहली पसंद बना हुआ है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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