India News: डॉलर के सामने रुपये की तेजी पर अचानक ब्रेक लग गया है। गुरुवार को रुपया नौ पैसे टूटकर 92.63 के स्तर पर बंद हुआ। पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भारी अनिश्चितता है। इन कारणों से विदेशी निवेशकों में काफी डर है। बुधवार को रुपये में अच्छी उछाल दर्ज की गई थी। लेकिन विदेशी बाजारों के खराब संकेतों ने पूरी स्थिति बिगाड़ दी है। इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।
विदेशी बाजारों के उतार चढ़ाव का प्रभाव
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को रुपया 92.63 के भाव पर खुला। कारोबार के दौरान रुपये ने 92.92 के निचले स्तर को छुआ। इसके बाद यह 92.53 के उच्च स्तर तक गया। अंत में यह 92.63 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह भाव पिछले बंद भाव से नौ पैसे की कमजोरी दिखाता है। बुधवार को ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष विराम की घोषणा हुई थी। इससे रुपया 52 पैसे मजबूत हुआ था।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई मुसीबत
मुद्रा कारोबारियों ने रुपये के गिरने की अहम वजहें बताई हैं। संघर्ष विराम के लगातार उल्लंघन की खबरें सामने आ रही हैं। इजराइल ने सैन्य कार्रवाई जारी रखी है। इसके कारण कच्चे तेल के दामों में तेजी आई है। विदेशी निवेशक भी लगातार बिकवाली कर रहे हैं। इन बातों ने रुपये पर भारी दबाव बनाया है। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड तीन प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है। यह 97.67 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
शेयर बाजार और विदेशी निवेशकों का रुख
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषक दिलीप परमार ने अहम जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि तेल की ऊंची कीमतों ने रुपये पर दबाव बनाया है। विनिमय दर आगे 92.50 से 93.40 के बीच रहेगी। घरेलू शेयर बाजार में भी भारी गिरावट देखी गई है। बाजार के कुछ प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
- बीएसई सेंसेक्स 931.25 अंक टूटकर 76,631.65 पर आया।
- एनएसई निफ्टी 222.25 अंक गिरकर 23,775.10 पर पहुंचा।
- विदेशी निवेशकों ने करोड़ों की भारी बिकवाली की है।


