Business News: ईरान युद्ध के बाद हुए अस्थायी सीजफायर ने भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। मध्य-पूर्व में हालात सामान्य होते ही कंपनियों ने अपनी रणनीति बदल दी है। निर्यात और उत्पादन को फिर से गति देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। युद्ध के दौरान कारोबार में 40 से 50 फीसदी की गिरावट आई थी, जो अब धीरे-धीरे सुधर रही है।
फार्मा से लेकर फूड कंपनियों में बढ़ी मांग
फार्मा सेक्टर में दवाओं की मांग तेजी से बढ़ने लगी है। कई देश अपना स्टॉक दोबारा भर रहे हैं। पैकेज्ड फूड कंपनियों ने भी सप्लाई चेन के सामान्य होने के संकेत दिए हैं। Parle Products और Dabur India जैसी कंपनियों के मध्य-पूर्व में प्लांट हैं। अब ये कंपनियां पूरी क्षमता से उत्पादन बढ़ा रही हैं। Blue Star भी बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन बढ़ाने की तैयारी में है।
इलेक्ट्रिकल कंपनियों को रीबिल्डिंग से बड़ा फायदा
एयर कंडीशनर, फ्रिज, वायर और केबल बनाने वाली कंपनियां भी बढ़ते ऑर्डर के लिए खुद को तैयार कर रही हैं। Havells India को उम्मीद है कि मिडिल ईस्ट में रीबिल्डिंग से उसे बड़ा फायदा मिल सकता है। कंपनी के कुल निर्यात का करीब 40 फीसदी हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। AWL Agri Business ने दुबई के जेबेल अली पोर्ट पर फिर से शिपमेंट शुरू करने की योजना बनाई है। कंपनी को उम्मीद है कि माल की वॉल्यूम बढ़कर 4,000 से 5,000 टन प्रति माह तक पहुंच सकती है।
शिपिंग रूट्स खुलने से SMEs को राहत
शिपिंग रूट्स खुलने से छोटे और मध्यम निर्यातकों (SMEs) को बड़ी राहत मिली है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें कम हो रही हैं। युद्ध के दौरान कंपनियां वैकल्पिक रूट्स जैसे ओमान के जरिए सप्लाई कर रही थीं। माल ढुलाई और बीमा की लागत, जो पहले 40 से 50 फीसदी तक बढ़ गई थी, अब धीरे-धीरे घट रही है। निर्यातकों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में कारोबार पूरी तरह पटरी पर आ जाएगा।


