World News: मध्य पूर्व में जारी तनाव को 4 सप्ताह हो चुके हैं, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ईरान पहले ही खारिज कर चुका है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है और कई देशों में ऊर्जा आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई है। ऊर्जा विशेषज्ञ भविष्य को लेकर गंभीर चेतावनी दे रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरती है 20 फीसदी तेल आपूर्ति
ऊर्जाअर्थशास्त्री अनस अल्हाजी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजाते हुए कहा है कि यदि ईरान से जुड़ा युद्ध जल्द खत्म नहीं हुआ, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो कुछ ही हफ्तों में इसके गंभीर परिणाम सामने आने लगेंगे। उन्होंने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया की लगभग 20 फीसदी तेल आपूर्ति गुजरती है। यहां किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार को बड़ा झटका दे सकती है।
यूरोप में ऊर्जा संकट गहराया, एशियाई बाजार में तेल की कीमतें 120 डॉलर के पार
अल्हाजीके अनुसार, यूरोप में ऊर्जा संकट तेजी से गहराता जा रहा है और कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे रूस के ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता फिर बढ़ सकती है। यूरोप कई वर्षों से रूसी तेल पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन यह संकट उस प्रयास को कमजोर कर सकता है। वहीं एशियाई बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव इसी तरह जारी रहा, तो क्रूड ऑयल की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ेगा।
लंबा संघर्ष बनेगा बड़ा खतरा
विशेषज्ञोंका मानना है कि ईरान युद्ध का असर मध्य पूर्व से दूर यूरोप और एशिया तक दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है और वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इससे न केवल ऊर्जा बाजार बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस संकट के समाधान पर टिकी हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।


