युद्ध के बीच औंधे मुंह गिरे सोने-चांदी के दाम, क्या ये है निवेश का सही समय या मचेगी और तबाही?

New Delhi News: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे भारी तनाव ने सराफा बाजार को पूरी तरह हिला कर रख दिया है। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। गुरुवार को 24 कैरेट सोने का भाव 5,346 रुपये टूटकर 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। बुधवार को यह भाव 1.51 लाख रुपये था। वहीं, चांदी भी 15,176 रुपये फिसलकर 2.25 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गई, जो 25 मार्च को 2.40 लाख रुपये थी। पिछले 34 दिनों के भीतर ही सोना 13,590 रुपये और चांदी 42,040 रुपये सस्ती हो चुकी है।

सोना 31 हजार तो चांदी 1.61 लाख रुपये गिरी

इस साल की शुरुआत में सोने और चांदी ने रिकॉर्ड ऊंचाई को छुआ था। 29 जनवरी 2026 को सोना अपने सबसे ऊंचे स्तर 1.76 लाख रुपये पर था। अब यह अपने शिखर से 31,000 रुपये नीचे आ चुका है। चांदी का हाल तो इससे भी बुरा है। 29 जनवरी 2026 को चांदी 3.86 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर थी। अब यह सीधे गिरकर 2.25 लाख रुपये पर आ गई है। पिछले 63 दिनों में ही चांदी की कीमत में 1.61 लाख रुपये की भारी गिरावट आई है।

आखिर क्यों आ रही है इतनी भारी गिरावट?

आमतौर पर युद्ध के समय सोने के दाम तेजी से बढ़ते हैं। लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल उलट है। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:

  • नकद पैसे की जरूरत: मध्य पूर्व के युद्ध को देखकर निवेशक डरे हुए हैं। वे अपना सोना बेचकर नकद पैसा जमा कर रहे हैं ताकि मुश्किल समय में उनके पास नकदी रहे।
  • मुनाफा वसूली: जनवरी में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर थीं। तब बड़े निवेशकों ने भारी मात्रा में अपना सोना बेचा। इससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और दाम गिर गए।
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व: अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने और फेडरल रिजर्व की सख्त नीतियों से भी कीमती धातुओं का आकर्षण कम हुआ है।
    कमोडिटी विशेषज्ञ अजय केडिया के मुताबिक यह गिरावट निकट भविष्य में भी जारी रह सकती है। इसलिए निवेशकों को अभी सोने-चांदी में पैसा लगाने से बचना चाहिए।

हर शहर में क्यों अलग होती है सोने की कीमत?

  • परिवहन और सुरक्षा: सोना एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में भारी खर्च और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत होती है। दूरी बढ़ने से दाम भी बढ़ जाते हैं।
  • खरीद की मात्रा: दक्षिण भारत में सोने की खपत 40 प्रतिशत तक है। वहां जौहरी थोक में सोना खरीदते हैं, जिससे कीमतों पर असर पड़ता है।
  • स्थानीय जौहरी संघ: हर शहर के सर्राफा संघ स्थानीय मांग और सप्लाई के हिसाब से अपने रेट तय करते हैं।
  • पुराना स्टॉक: जौहरी जिस कीमत पर पुराना माल खरीदते हैं, उसी लागत के आधार पर वे आगे ग्राहकों को माल बेचते हैं।

सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • हमेशा बीआईएस (BIS) प्रमाणित और हॉलमार्क वाला ही सोना खरीदें। इसमें अक्षरों और अंकों का एक मिश्रित कोड (जैसे AZ4524) होता है। यह शुद्धता की असली पहचान है।
  • खरीदने से पहले इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट पर मौजूदा भाव जरूर चेक करें। 24, 22 और 18 कैरेट के दाम उनकी शुद्धता के अनुसार अलग-अलग होते हैं।

असली और नकली चांदी कैसे पहचानें?

  • चुंबक टेस्ट: असली चांदी कभी चुंबक से नहीं चिपकती है। अगर चिपके तो वह नकली है।
  • बर्फ टेस्ट: चांदी पर बर्फ का टुकड़ा रखें। असली चांदी पर बर्फ बहुत तेजी से पिघलती है।
  • गंध टेस्ट: असली चांदी में कोई महक नहीं होती। नकली चांदी से तांबे जैसी गंध आती है।
  • कपड़ा टेस्ट: सफेद कपड़े पर चांदी रगड़ने से अगर काला निशान बने, तो चांदी बिल्कुल असली है।

भारतीयों के घरों में देश की जीडीपी से ज्यादा का सोना

भारतीय घरों में सोने का भारी-भरकम भंडार है। मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट बताती है कि भारतीयों के पास लगभग 34,600 टन सोना है। इस सोने की कुल कीमत 5 ट्रिलियन डॉलर (450 लाख करोड़ रुपये) से भी ज्यादा हो गई है। यह आंकड़ा भारत की कुल जीडीपी 4.1 ट्रिलियन डॉलर (370 लाख करोड़ रुपये) से भी अधिक है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस के पार बिक रहा है। भारतीय रुपयों में यह कीमत 1.30 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम बैठती है।

SOURCE: न्यूज़ एजेंसियां
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