New Delhi News: भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। मशहूर अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने भारतीय बाजार की रेटिंग घटा दी है। पहले भारत ‘ओवरवेट’ की मजबूत श्रेणी में था। अब इसे घटाकर ‘न्यूट्रल’ कर दिया गया है। रेटिंग घटने के पीछे ईरान युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बड़ा कारण हैं। विदेशी निवेशक भी लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। इसके अलावा, एआई तकनीक के वैश्विक बदलावों ने भी बाजार का गणित बिगाड़ दिया है।
विदेशी ब्रोकरेज ने घटाया निफ्टी का लक्ष्य
नोमुरा की रिपोर्ट ने आम निवेशकों की चिंता काफी बढ़ा दी है। दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल का सीधा असर भारतीय कंपनियों पर पड़ रहा है। इसी खतरे को देखते हुए नोमुरा ने निफ्टी का लक्ष्य भी घटा दिया है।
- दिसंबर 2026 के लिए निफ्टी का लक्ष्य 29,300 से घटाकर 24,900 कर दिया गया है।
- 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद निफ्टी पहले ही 11 प्रतिशत गिर चुका है।
- गोल्डमैन सैक्स और यूबीएस जैसी दिग्गज संस्थाएं भी पहले ही ऐसी चेतावनी दे चुकी हैं।
नोमुरा ने अपने निवेशकों को अब दक्षिण कोरिया और चीन के बाजारों में पैसा लगाने की सलाह दी है।
ईरान तनाव और कच्चे तेल की मार
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर काफी ज्यादा निर्भर है। ईरान और मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध का हमारी अर्थव्यवस्था पर सीधा और बुरा असर पड़ता है। नोमुरा ने अपनी रिपोर्ट में होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र किया है।
- वहां तेल की आपूर्ति रुकने से कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक अधिक रह सकती हैं।
- ऊर्जा महंगी होने से भारतीय कंपनियों की लागत तेजी से बढ़ती है।
- लागत बढ़ने से कंपनियों के मुनाफे में कमी आती है।
विदेशी निवेशक इन्हीं खतरों से डरकर बाजार से दूरी बना रहे हैं।
एआई (AI) निवेश में भारत पीछे छूटा
आज पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर भारी निवेश हो रहा है। नोमुरा का मानना है कि इस वैश्विक एआई बूम का फायदा भारत को कम मिल रहा है। ब्रोकरेज फर्म ने भारत को तकनीकी रूप से एआई “हैव-नॉट” (AI ‘have-not’) माना है। विदेशी निवेशक अब तकनीकी रूप से ज्यादा मजबूत देशों में पैसा लगा रहे हैं। युद्ध के बाद दक्षिण कोरियाई बाजार 15 प्रतिशत गिरे हैं। इसलिए वहां निवेश के बेहतर और सस्ते मौके बन रहे हैं।
घरेलू निवेशकों ने बाजार को ढहने से बचाया
विदेशी संस्थाएं भले ही रेटिंग घटा रही हैं, लेकिन भारतीय निवेशकों का बाजार पर पूरा भरोसा कायम है। यह इस पूरी तस्वीर का सबसे सकारात्मक पहलू है।
- सितंबर 2024 के बाद से विदेशी निवेशकों ने लगभग 61.2 बिलियन डॉलर निकाल लिए हैं।
- इसके बावजूद भारतीय शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह नहीं बिखरा है।
- आम निवेशकों ने SIP और एकमुश्त निवेश के जरिए करीब 60 बिलियन डॉलर बाजार में डाले हैं।
नोमुरा ने चेतावनी दी है कि रिटर्न कम होने पर घरेलू निवेश थोड़ा घट सकता है। फिर भी, भारतीय निवेशक अब छोटी गिरावट से घबराते नहीं हैं। वे लंबी अवधि की सोच के साथ भारत की ग्रोथ स्टोरी पर अपना पैसा लगा रहे हैं।
डिस्क्लेमर:
यह खबर केवल सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। इसे किसी भी तरह से निवेश की सीधी सलाह न मानें। बाजार में कोई भी पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से बात जरूर करें।

